अक्सर माँ अपने बच्चों को बुरी नज़र से बचाने के लिए उन्हें काला टीका और आँखों में काजल लगाती है, लेकिन एक माँ को अपने बच्चे की कजरारी आँखों की देखभाल की जानकारी होना भी ज़रूरी है। अगर लगातार आपके बच्चे की आँखों में पानी आ रहा हो तो इस समस्या को सही समय पर पहचानकर इलाज करवाना ज़रूरी होता है।

आँखों में पानी आने की समस्या

आँख की अश्रु संरचना जानें

व्यक्ति की आँख में अंदर की तरफ़ आंसू की एक नली होती है। जो कि आँख के अंदर के हिस्से से शुरु होकर नाक के नीचे के हिस्से में खुलती है, इसे नेजोलेक्रॉई मल डक्ट कहते हैं। व्यक्ति की आँखों में आँसू लगातार बनते रहते हैं। जो आँखों की नली के माध्यम से नाक के नीचे के हिस्से से होते हुए गले में लगातार जाते रहते हैं। इस कारण आँसू आँख से बाहर गिरने से बच जाते हैं। जब आँख की नली किसी कारण वश बंद हो जाती है, तो आँखों में पानी भरने लगता है और आँसू बाहर निकलने लगते हैं।

आँखों में पानी आने का कारण

लगभग 30% नवजात बच्चों की अश्रु नली जन्म के समय बंद होती है। ऐसा आँख की नली के निचले हिस्से पर एक झिल्ली बने होने के कारण होता है। इसके अलावा अन्य कारण भी हैं – जैसे आँसू की नली में एपिथिलियल कोशिकाओं का जमाव आदि। नवजात बच्चे में इस स्थिति को कंजेनाइटल डेक्रायोसिस्टाइटिस कहते हैं।

बच्चे की आँखों मे पानी आने से अश्रु नली में लगातार आँसू भरे होने के कारण उसमें बैक्टीरिया पनपने लगता है। जिससे आँख में संक्रमण एवं कंजक्टीवाईटिस नामक बीमारी होने की आशंका बनी रहती है। बच्चे की आँसू की नली के ऊपर दबाव डालने से, संक्रमण होने की स्थिति में पस भी निकलने लगता है।

आँख में पानी आने का उपचार

इसके उपचार के लिए बच्चे की नाक के दोनों तरफ़ अश्रु नली के ऊपर दिन में चार पांच बार ब्रांड स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक आई ड्राप का इस्तेमाल करते हैं।

डॉक्टरी परामर्श आवश्यक है

अगर बच्चे को यह समस्या लगातार बनी रहे और ठीक न हो रही हो तो आप तुरंत डॉक्टरी परामर्श लीजिए। ऐसी स्थिति में किसी भी तरह की लापरवाही न करें।