Tomato chutney vrat special

काई से बनेगा हवाई जहाज उड़ाने का बायो ईंधन

वायुयानों के उड़ान भरते ही ईंधन जलने पर भारी मात्रा में कार्बन उत्सर्जन होता है। जिसके बारे में सम्पूर्ण विश्व बड़ी गम्भीरता से विचार कर रहा है ताकि कार्बन उत्सर्जन को कम किया जा सके। इसी दिशा में वैज्ञानिकों ने काई से हवाई जहाज का बायो ईंधन _ Biofuel बनाने के बारे में सोच रहे हैं।

काई से बना बायो ईंधन

इस सिलसिले में जर्मनी के म्यूनिख शहर में वैज्ञानिक ऑटोब्रुन एयरबस साइट पर एक खुले टैंक में काई उगा रहे हैं। म्यूनिख टेक्निकल यूनिवर्सिटी इस परियोजना में काई को बायो ईंधन के रूप में प्रयोग करना चाहती है। उनका मानना है कि इस जैव ईंधन से हवाई जहाज भी उड़ाया जा सकता है। अभी यह परियोजना प्रायौगिक स्तर पर है, व्यावसायिक उत्पादन अभी दूर की बात है। लेकिन इस प्रोजेक्ट से इस क्षेत्र में बहुत आस जगी है।
बायोईंधन काई
इंडस्ट्रियल बायोकैटेलिसिस विषय के एसोसिएट प्रोफ़ेसर थॉमस ब्रुएक के अनुसार साल 2050 तक कृषि क्षेत्र में पैदा किया जाने वाला बायो ईंधन कुल प्रयोग किए जाने वाले जेट ईंधन का 3-5% तक होगा।
हवाई जहाजों के लिए जैव ईंधन बनाने में कई और फ़सलों का प्रयोग पहले से हो रहा है। लेकिन यह इतना महंगा है कि लुफ़्थांसा और केएलएम जैसी बड़ी एयरलाइंस ही इसे बतौर ईंधन प्रयोग कर रही हैं।

एल्गी की खेती

खेतों में पैदा की जाने वाली फ़सल की तुलना में काई 12 गुना तेज़ी से पैदा की जा सकती है। सफ़ेद सरसों की तुलना में काई से 30 गुना अधिक तेल निकाला जा सकता है। यही कारण है कि वैज्ञानिक काई उत्पादन में अधिक सम्भावनाएँ देखने लगे हैं।
शैवाल काई एल्गी मॉस
प्रोफ़ेसर ब्रुएक बताते हैं कि काई से मिलने वाले बायो ईंधन को शत प्रतिशत कैरोसीन ईंधन के बदले इस्तेमाल नहीं किया जाएगा, बल्कि कई तकनीकों का प्रयोग किया जाएगा।
इस परियोजना पर 1 करोड़ यूरो से अधिक खर्च किया जा चुका है लेकिन एयएलाइंस के लिए अभी भी यह बहुत महंगा ईंधन है। लेकिन विमान निर्माता कम्पनी एयरबस के प्रतिनिधि के अनुसार काई से बना कैरोसीन सही दामों पर उपलब्ध कराया जा सकेगा। इस परियोजना में यूरोपीय एरोस्पेस संघ की ओर से भी आर्थिक मदद की गई है।

Leave a Comment

Your email address will not be published.

Scroll to Top