एच1एन1 वायरस पूरे विश्व में जानलेवा साबित हुआ है। हमारे देश में भी बदलते मौसम में एच1एन1 वायरस बहुत एक्टिव है। अधिकांश मामलों में 50 प्रतिशत लोगों की जांच में यह वायरस पॉजिटिव मिला है। स्वाइन फ्लू के इलाज से बेहतर बचाव है। आज हम आपसे इसी विषय पर चर्चा करने जा रहे हैं। जिससे आपके भ्रम दूर होंगे और स्वाइन फ्लू से बचाव की जानकारी भी मिलेगी।

स्वाइन फ्लू से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर

स्वाइन फ्लू कब फैलता है

सर्दी, नमी, उमस, बारिश और मौसम बदलने पर एच1एन1 वायरस एक्टिव हो जाता है।

स्वाइन फ्लू क्या है

यह एक तरह की सांस की बीमारी है, जो एच1एन1 वायरस से संक्रमण से होती है। जिसका स्ट्रेन एक-दो साल में बदल जाता है।

स्वाइन फ्लू कैसे होता है

जब व्यक्ति खांसता या छींकता है तो नाक और मुँह से निकलने वाले गीले कण हवा और जमीन में फैल जाते हैं। ये कण वायरस की चपेट में आ सकते हैं। वायरस से दूषित कण हवा या छूने के कारण दूसरे व्यक्ति के शरीर में मुंह या नाक में पहुंचते हैं। इस तरह वायरस का संक्रमण फैलता है।

स्वाइन फ्लू के लक्षण क्या हैं

– नाक बहना, छींके आना, नाक रुंध जाना
– मांसपेशियों में दर्द या अकड़न महसूस होना
– भयानक सिर दर्द होना
– सर्दी जुकाम और लगातार खांसी आना
– दिन भर नींद आना, थका थका सा रहना
– बुखार की दवा बेअसर होना
– गले में खराश का लगातार बढ़ना

स्वाइन फ्लू नॉर्मल फ्लू से कैसे अलग है

सामान्य सर्दी जुकाम बुखार और स्वाइन फ्लू के लक्षण मिलते जुलते हैं। लेकिन इस संक्रमण में जुकाम बहुत रहता है। नाक बहती रहती है। पीसीआर टेस्ट करवाकर ही एच1एन1 वायरस की पुष्टि की जा सकती है। इसका इलाज पहले 48 घंटों में शुरु हो जाए तो मरीज स्वस्थ हो सकता है। 5 दिन के इलाज में टेमीफ्लू दवा दी जाती है।

एच1एन1 वायरस की उम्र क्या है

स्वाइन फ्लू का वायरस स्टील और प्लास्टिक पर 48 घंटे, कपड़ों और पेपर पर 12 घंटे, टिशू पेपर पर 15 मिनट और हाथों पर 30 मिनट तक एक्टिव रह सकता है। डिटर्जेंट, ब्लीच या साबुन का इस्तेमाल करके इसे खत्म कर सकते हैं।

मरीज में इसके लक्षण एक सप्ताह के अंदर दिखने लगते हैं। लक्षण दिखने के 24 घंटे पहले और 8 दिन बाद भी वायरस दूसरे व्यक्ति को चपेट में ले सकता है।

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स्वाइन फ्लू की दवा क्या है

एच1एन1 वायरस के संपर्क में आने वाले 90% मरीज बिना इलाज के अपने आप ठीक हो जाते हैं। पहले से बीमारी व्यक्तियों को ही अक्सर इलाज की जरूरत होती है। अधिकतर इम्यून सिस्टम के आगे यह वायरस कमज़ोर पड़ जाता है। स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए किसी दवा की जरूरत नहीं पड़ती है। एच1एन1 वायरस से ग्रसित व्यक्ति 7 दिन के अंदर स्वयं स्वस्थ हो जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट बताती है कि टेस्ट पॉजिटिव आने पर भी मरने वालों की संख्या केवल 0.4 % ही होती है। इसलिए अपने आपको चुस्त दुरुस्त और तंदुरुस्त रखें। स्वाइन फ्लू के इलाज के लिए डॉक्ट टेमीफ्लू दवा देते हैं।

इस संक्रमण से लड़ने के लिए खानपान पर ध्यान देना चाहिए। स्वाइन फ्लू में खानपान की जानकारी पढ़ें।

स्वाइन फ्लू से बचाव कैसे करें

– छींक आने पर रूमाल या टिशू पेपर का प्रयोग करें
– थोड़ी थोड़ी देर पर हाथ को साबुन से धोते रहें
– लोगों से हाथ मिलाने, गले लगने और चूमने से बचें
– फ्लू को नजरअंदाज न करें, डॉक्टरी परामर्श लें
– आपको फ्लू हो जाए तो दूसरों से 1 मीटर की दूरी बनाकर रखें

स्वाइन फ्लू में मास्क का प्रयोग कब करें

– संक्रमित मरीजों को मास्क जरूर पहनना चाहिए
– आप भीड़ भाड़ वाली जगह पर सावधानी के लिए मास्क पहनकर जाएं
– सामान्य मास्क एच1एन1 वायरस से बचाव नहीं करते, थ्री लेयर सर्जिकल मास्क 4-घंटे और एन-95 8 घंटे पहना जा सकता है।
– मास्क को 6 घंटों से अधिक न पहनें, अपनी सांस से भी मास्क खराब हो जाता है।

स्वाइन फ्लू की वैक्सीन लगवाएं

हर साल एच1एन1 वायरस का स्ट्रेन बदलता है इसलिए हर साल वैक्सीन लगवाना जरूरी है। अगर स्वाइन फ्लू की वैक्सीन अपडेट नहीं हुई तो वायरस में हुआ बदलाव घातक हो सकता है।

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