ठंड के दिनों में दुनिया भर से स्वाइन फ़्लू का वायरस फैलने की ख़बर आने लगती है। पिछ्ले कुछ वर्षों से हमारे देश भारत में भी इसका प्रकोप देखने को मिल रहा है। जैसे ही गर्मियों का मौसम ख़त्म होता है, बारिश के साथ-साथ स्वाइन फ़्लू और डेंगी जैसी जानलेवा बीमारियों की ख़बर टीवी अखबार में आने लगती है। स्वाइन फ़्लू तेज़ी से फैलने वाला एक संक्रामक रोग है। समय पर रोकथाम और इलाज न करने से बीमारी जानलेवा साबित होती है।

इंफ़्लुएंज़ा ए सुअरों का वायरस है, जिसका संक्रमण हम मनुष्यों में हो जाता है। यह सांस संबंधित विषाणु संक्रमण है। स्वाइन फ़्लू का वायरस 4 प्रकार का होता है- H1N1, H1N2, H3N1 और H3N2. इनमें से H1N1 वायरस सबसे भयावह है। इस वायरस की चपेट में कई लोग आ चुके हैं।

स्वाइन फ़्लू वैक्सीन

लक्षण

ज़ुकाम बुखार स्वाइन फ़्लू का पहला लक्षण है। पहले पहल रोगी को ज़ुकाम होता है फिर बुखार हो जाता है। इस संक्रमण के लक्षण इंफ़्लुएंज़ा के लक्षण जैसे ही होते हैं।

१. अधिक ठंड लगना, फिर बुखार होना
२. गला ख़राब हो जाना और खांसी आना
३. सिर दर्द के साथ बदन दर्द की शिक़ायत होना
४. शारीरिक कमज़ोरी आना

स्वाइन फ़्लू का घरेलू उपचार

१. थायमोल, मेंथाल और कपूर को समान मात्रा में मिलाकर घोल बनाएं। इस घोल को रुमाल या टिशू पेपर पर डुबोकर थोड़ी थोड़ी देर में सूंघें। इससे स्वाइन फ़्लू के वायरस का संक्रमण नहीं होने पाएगा।

२. प्रतिदिन स्नान करने के बाद तुलसी की पत्तियों को धोकर खाएं। तुलसी के पत्ते खाने से गला और फेफड़ा साफ़ रहता है और संक्रमण से बचने की क्षमता विकसित होती है।

३. गिलोय की डंडी को पानी में उबालें और पानी को छानकर पी लें। इसके साथ 1 कप पानी में आधा चम्मच आंवला चूर्ण मिलाकर पीने से इम्यूनिटी बढ़ती है।

४. तुलसी के पत्ते, काली मिर्च और अदरक को उबालकर काढ़ा बनाएं। इसे पीने से ज़ुकाम बुखार नहीं होता है। सादा पानी पीने की जगह पर तुलसी के पत्तों के साथ उबला पानी पिएं।

५. स्वाइन फ़्लू में हल्दी का सेवन करना अत्यंत लाभकारी है। नियमित एक बार हल्दी वाला दूध पीजिए।

एलोपैथी में स्वाइन फ़्लू का इलाज

१. इस संक्रमण के होने पर TamiFlu और Relenza नाम की दवाएं दी जाती हैं। जिससे स्वाइन फ़्लू का वायरस समाप्त हो जाता है।

२. TamiFlu और Relenza वैक्सीन संक्रमण रोकने में सफल नहीं है, पर यह संक्रमण का असर कम कर देती है।

Child vaccination

स्वाइन फ़्लू का आयुर्वेद में उपचार

१. त्रिभुवन कीर्ति रस, संजीवनी वटी या भूमि आंवला के सेवन करना चाहिए। यह दवा आयुर्वेद केंद्रों और पतंजलि की शॉप पर मिल जाएगी।

२. बुखार होने पर अग्निकुमार रास की 2-2 गोली दिन में 3 बार खानी चाहिए।

स्वाइन फ़्लू का होम्योपैथी में इलाज

सल्फ़र 200 की 5 बूंदे दिन में 2 बार लगातार 5 दिन तक लेनी चाहिए। इससे शरीर की इम्यूनिटी बढ़ जाती है। संक्रमण की चपेट में आने से पहले इसका सेवन करें, तो स्वाइन फ़्लू आपका कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा।

रोगी का आहार

१. एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर भोजन कीजिए। एंटी ऑक्सीडेंट, विटामिन और मिनिरल वाली खाद्य वस्तुएं रोगी को खिलाएं। इससे शरीर में इम्यून पॉवर बढ़ेगी। हरी सब्ज़ी और फल एंटी ऑक्सीडेंट का स्रोत हैं।

२. फलों में सेब, अनार, नाशपाती, संतरा, अंगूर, अनानास और तरबूत में इम्यूनिटी बढ़ाने वाले तत्व होते हैं। ये सब विटामिन, मिनिरल और एंटी ऑक्सीडेंट के स्रोत हैं।

३. सब्ज़ियों पत्ता गोभी, हरी मटर, ब्रोकली, टमाटर, पालक और लौकी बहुत लाभदायक है।

४. आंवला, पालक और गाजर का रस पीने स्वाइन फ़्लू का इलाज करने में मदद मिलती है।

5. तुलसी, हल्दी और लहसुन खाने से भी शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

6. शक्ति पाने के लिए मांसाहार करने वाले मांस, मछली और अंडा खा सकते हैं।

संक्रमण से बचाव

पहले भी बता चुके हैं कि स्वाइन फ़्लू का वायरस तेज़ी से फैलता है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के द्वारा खांसने, छींकने, नाक और मुँह पर हाथ लगाने के बाद दूसरी वस्तुओं को छूने, खाने पीने के बर्तनों, इस्तेमाल की अन्य वस्तुओं के संपर्क में आने दूसरों में फैलता है।

स्वाइन फ़्लू संक्रमण के मामले में बचाव वास्तव में इलाज से कहीं ज़्यादा बेहतर है। इसलिए बताए गए उपायों को अमल में लाकर संक्रमण से बचें। एलोपैथी और होम्योपैथी दवा लेने से पहले डॉक्टरी सलाह लीजिए।