वर्जिनटी की पहचान करने का तरीक़ा

वर्जिनटी या कौमार्य हमेशा से ही वाद-विवाद का विषय रहा है। भारतीय समाज में तो शादी के लिए लड़की का वर्जिन होना अनिवार्य है। अन्यथा उसे कुलक्षणी, कुल्टा जैसे शब्दों से सम्बोधित किया जाता है। अगर किसी को पता चल जाए कि लड़की वर्जिन नहीं है तो उसकी शादी होनी बहुत मुश्किल हो जाती है, क्योंकि वर्जिनटी को लड़की के चरित्र से जोड़कर देखा जाता है। इस सबके चलते समाज में वर्जिनटी को लेकर अनेक भ्रांतियाँ व्याप्त हो चुकी हैं। आइए इसके पीछे छिपे सच और झूठ की खोजबीन करते हैं।

वर्जिनटी या कौमार्य - Love making couple

वर्जिनटी क्या है?

फ़ीमेल वजाइना के भीतर एक परमीएबल हाइमन झिल्ली होती है। अगर किसी लड़की में यह झिल्ली सुरक्षित रहती है, तो उसे वर्जिन माना जाता है। अगर किसी कारणवश यह हाइमन झिल्ली फट जाए अथवा नष्ट हो जाए तो इससे लड़की की वर्जिनटी ख़त्म हो जाती है।

समाज में शादी से पहले हाइमन झिल्ली नष्ट होने का कारण बिना सोचे समझे यौन सम्बंध बनाने से जोड़ दिया जाता है। जब किसी लड़की के साथ ऐसा होता है और मेडिकल रूप से प्रमाणित हो जाए तो उसे चरित्रहीन बताकर दरकिनार कर दिया जाता है। यह कुरीति समाज से वर्षों से चली आ रही है। आज भी लोग इस बात पर विश्वास करते हैं।

चिकित्सक कहते हैं…

दुनिया भर के गायनिलॉजिस्ट हाइमन झिल्ली को सच मानते हैं, लेकिन उनका कहना है कि हाइमन झिल्ली न होने का अर्थ ये नहीं कि लड़की ने यौन सम्बंध बनायें हैं या फिर वो वर्जिन नहीं है। जब लड़की शादी होती है तो सेक्स करते समय हाइमन झिल्ली फट जाती है और मामूली रक्त स्राव भी होता है। लेकिन रक्त स्राव होना भी आवश्यक नहीं होता है।

आज महिला सशक्तिकरण के दौर में, महिलाएँ घर सम्भालने के साथ घर बाहर भी काम करने लगी हैं। वह अनेक खेल कूद और फ़िज़िकल एक्टिविटी में भाग लेती हैं। विशेषज्ञ डाक्टर बताते हैं 90 प्रतिशत साइकल चलाने वाली, घुड़सवारी करने वाली, डैंस करने वाली या दूसरी स्ट्रेचिंग वाली एक्टिविटी के कारण हाइमन झिल्ली फट जाती है। इसलिए आज इसके आधार पर किसी महिला चरित्र का प्रमाणपत्र देना उचित नहीं ठहराया जा सकता है। अगर आप ऐसा करते हैं तो शायद आपका वर्जिन लड़की से शादी करने या करवाने का सपना अधूरा ही जाएगा।

समाज में वर्जिनटी को लेकर भ्रम की स्थिति बने रहने का कारण सेक्स एजुकेशन की कमी का परिणाम है और इसलिए समाज को सेक्स एजुकेशन का महत्व समझना होगा। ताकि किसी मासूम लड़की को बेवजह चरित्रहीनता का सर्टिफ़िकेट न मिल जाए। बहुत दुख की बात है कि शादी की पहली रात बहुत से मर्द अपनी पत्नी को प्यार करने की बजाय उसकी हाइमन झिल्ली टूटने और रक्त स्राव पर ध्यान लगाए रहते हैं और अपेक्षिक परिणाम न मिलने पर उनके रिश्ते कमज़ोर हो रहे हैं।