रेप क्यों बढ़ रहे हैं? आख़िर इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है?

आज कल आए दिनों न्यूज़ में, अख़बार में, फ़ेसबुक, ट्विटर आदि पर जो ख़बर सुर्ख़ियों में रहती है वो है “बलात्कार”। “बलात्कार” की ख़बर सुनने के बाद ऐसा लगता है कि ये क्या हो रहा है? लोग ऐसा क्यों कर रहे है? जब ये ख़बर सुनने को मिलती है कि एक स्कूल के कर्मचारी ने स्कूल में पढ़ने वाली 14 साल की बच्ची का बलात्कार किया और बच्ची ने मौक़े पर अस्पताल में दम तोड़ दिया तो दिल तड़प उठता है और मन में विचार आता है कि इंसान इतना बेरहम कैसे हो सकता है और ऐसी घिनौनी हरक़त लोग करते कैसे हैं? ऐसी परिस्थिति में सबके मन बस एक सवाल उठता है कि “रेप क्यों होता है?”

आइए मैं आपको, आपके मन में उठने वाले इस सवाल का जवाब देता हूँ उम्मीद है आप दिये हुए जवाब से सन्तुष्ट होगें और कमेंट बाक्स में कमेंट्स करेगें और साथ ही साथ भी शेअर करेगें।

रेप क्यों और किसलिए

सच की ताक़त

एक सिनेमाघर में 8 साल के एक लड़के ने राजा हरिश्चंद्र का नाटक देखा, जिसमें दिखाया गया कि राजा हरिश्चंद्र ने कैसे सच्चाई के लिए संघर्ष किया… उस नाटक से प्रभावित होकर उस बच्चे ने क़सम खायी कि मैं आजीवन झूठ नहीं बोलूंगा और सच्चाई के रास्ते पर चलूँगा। ये लड़का आगे चलकर महात्मा गांधी के नाम से विश्वविख्यात हुआ।

संगत का असर

हम सभी इस बात से भली भाँति परिचित है कि जैसी संगत वैसी रंगत अर्थात्‌ हम जिस माहौल में रहते हैं उस माहौल के रंग रूप मे ढल जाते हैं। बचपन में हम सबने चिड़िया के दो बच्चों की कहानी पढ़ी होगी जिसमें, एक जंगल में एक चिड़िया का परिवार और उसके छोटे छोटे 2 बच्चे होते हैं, जो उसकी हर बात मानते हैं, एक दिन भयंकर आंधी की चपेट में आकर वो दोनों बेटे अपनी माँ से अलग हो जाते हैं, एक बच्चा साधुओं के आश्रम में चला जाता है और दूसरा गुंडे मवालियों के साथ उनके बीच में रहने लगता है, कुछ सालों बाद जब वो चिड़िया अपने एक बेटे से मिलती है तो अपनी माँ को देखकर सादर प्रणाम करता है और साधुओं की संस्कारी संगत में रहने के कारण वह अपनी माँ की सेवा करता है। एक दिन चिड़िया अपने दूसरे बेटे की खोज में चली जाती है और कठिन परिश्रम करके उसे ढूँढ़ लेती है, लेकिन वो अपनी माँ की कोई इज़्ज़त नहीं करता है, दुर्व्यवहार करता है और बात बात में गालियां देता है। इस कहानी से ये सिद्ध होता है कि हम जिस परिवेश में रहते हैं, उसका असर सीधे हमारे दिमाग़ और आचरण पर पड़ता है।

हमारा समाज, परिवेश इस कहानी पर आधारित है। आइए इस कहानी को अपने समाज से जोड़ कर देखते हैं।

रेप क्यों और विकार उत्पत्ति के कारण

सनी लियोनी मैनफ़ोर्स विज्ञापन

आज 6 साल की उम्र से ही मासूम बच्चे टीवी में नंगापन देखते हैं, क्योंकि उनकी माँ भी देखती है, उनका बाप भी देखता है और उसके भाई – बहन सब देखते हैं। आपको याद होगा एक टाइम था जब बड़े टीवी पर एक Kiss सीन आने पर तुरंत चैनल चेंज कर दिया करते थे और बच्चों के सामने असहज महसूस करते थे और आज Sunny Leone almost नंगी अवस्था में कहती है – “जब सुबह शुरू हो.. जब शाम ख़त्म हो… बेवजह… बेवक़्त… जब ख़ाहिश हो.. कभी Coutch पर, कहीं जाने से पहले… Manforce Strawberry Flavored Condom” – तब भी किसी को ये ग़लत नहीं लगता। उनकी दीदी, पड़ोस में रहने वाली लड़कियां, सविता भाभी भी छोटे कपड़े पहनती हैं। सड़क में अधनंगी अप्सराएँ बच्चों को आसानी से दिख जाती हैं और जब तक बच्चा 18 साल का होता है तब तक हज़ारों चुम्मा-चाटी, रेप और सेक्स के सीन फ़िल्म – टीवी के माध्यम से देख चुका होता है; और इन सबको आज का नंगा समाज ग़लत भी नहीं मानता।

ऐसे में बच्चा साधू या महापुरुष कैसे बनेगा? रेप क्यों नहीं करेगा? वो तो बलात्कारी ही बनेगा…

दोस्तों बात सच है इसलिए कड़वी है, बलात्कार के लिए काफ़ी हद तक बच्चों की परवरिश और हमारे चारों ओर का माहौल भी बहुत हद तक ज़िम्मेदार है।

संस्कार ही संस्कार सिखा सकते हैं

अपने घर के बच्चों, लड़के – लड़कियों को सही संस्कार सिखायें, ग़लत करने पर मारने पीटने से पहले उन्हें ढंग से ये समझायें कि सही क्या है और ग़लत क्या है? अगर आप पहले ही सही और ग़लत की सीख नहीं देते तो तो ग़लती करने पर आपका उनको डाटना या मारना आपकी मूर्खता है; क्योंकि आपने उन्हें ये तो बताया ही नहीं है कि जो वो कर रहे है वो ग़लत है और उन्हें इसकी बजाय क्या करना चाहिए?

एक बात और कि, बच्चों में संस्कार एक दिन में नहीं भरे जा सकते, जैसे ज़िन्दा रहने के लिए हम एक दिन में पूरी ज़िंदगी का खाना नहीं खा सकते, हमें रोज़ थोड़ा थोड़ा खाने कि ज़रूरत होती है उसी तरह अच्छे चरित्र के लिए बच्चों को नियमित सही चीज़ों का ज्ञान देना ज़रूरी है। रेप क्यों होते हैं, यह चर्चा सार्थक है लेकिन संस्कार क्यों नहीं सिखाये जा रहे इस पर बाद में चर्चा ज़रूर करेंगे।

टी० वी० कौन सा प्रोग्राम देखें

TV ने आज कल के बच्चों, और ख़ासकर लड़कियों और औरतों का दिमाग़ ख़राब करके रखा हुआ है। Star Plus, Zee TV और ऐसे दर्जनों टी०वी० चैनलों पर दिन रात ‘रेप क्यों और किसलिए’ इस पर चर्चा की बजाय उन्हें रोमांचक बनाकर परोसा जा रहा है, ये सब धड़ल्ले से दिखाया जा रहा है और महिलाओं के दिमाग़ में ज़हर भरा जा रहा है। ऐसी बातों का सीधा असर पारिवारिक रिश्तों पर पड़ता है। उन्हें इससे दूर रखें, लेकिन ध्यान रहे कि आपका तरीक़ा ग़लत न हो।

संस्कार कैसे सिखायें?

हिंदू संस्कार

जब आप बच्चे को कुछ सिखाते हैं तो ध्यान रखें की आप ख़ुद भी उन बातों का पालन करते हों या कम से कम उनके सामने तो ये ज़रूर दिखायें कि आप वो करते हो, जैसे यदि आप अपने बच्चे को सिखाते हो – बेटे सुबह उठने के बाद दादा – दादी को प्रणाम करना चाहिए, और आप ख़ुद भी सुबह उठने पर बच्चों के सामने उन्हें प्रणाम करते हो तो बच्चे बहुत जल्दी सीख जाते हैं ।

मैं अपने छोटे भाई को बहुत टाइम से सिखाता था कि जिस दिन स्कूल की छुट्टी हो उस दिन सुबह उठने के बाद नहा धो कर मंदिर ज़रूर जाया कर, पर वो नहीं जाता था। फिर कुछ दिनों पहले मेरी मम्मी ने पंडित जी को मेरी कुंडली दिखायी, क्योंकि मेरा काम में बहुत नुक़सान हो रहा था तो पंडित जी ने मुझे कुछ उपाय बताये (हाँ उन उपायों ने बहुत असर डाला, पर इस बारे में डीटेल में फिर कभी बताऊंगा। इन उपायों में से एक था, कि प्रतिदिन सुबह मंदिर जाना है और शिवलिंग पर जल चढ़ाना है, मैं जाने लगा। अब मेरा भाई बिना कहे छुट्टी वाले दिन सुबह और हर मंगलवार को मंदिर जाता है क्योंकि मैं भी जाता हूँ ।

कहानी का सार है कि.. अपने बच्चों को अच्छे संस्कार दें, उन्हें सही और ग़लत बातों का फ़र्क बतायें और किस समय क्या काम करने चाहिए समझायें। दुनिया में हर क़िस्म के लोग हैं, भलाई इसी में है कि ख़ुद मजबूत रहें, आस पास के माहौलल को अच्छे से अच्छा रखने कि कोशिश करें और सही रास्ते पर चलें ।

रेप क्यों हो रहे हैं? इनकी संख्या क्यों बढ़ रही है? इसके पीछे अनेक कारण हैं। लेकिन उपरोक्त बातों पर ध्यान दिया जाए तो समाज में परिवर्तन आ सकता है। अब, यदि आपको मेरी बात में एक भी Point अच्छा लगा हो तो नीचे शेयर करने के बटन दिए गए है, आप अपने परिवार, दोस्तों और Facebook Friends के साथ ज़रूर शेयर करें ।