आर्कटिक समुद्र की बर्फ़ एक साल में ख़त्म होने की आशंका

कैब्रिज यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने बड़ी भयावह संभावना व्यक्त की है कि अगले साल तक आर्कटिक समुद्र की बर्फ़ गल जाएगी। यह संभावना अगर सच साबित हुई तो 1 लाख 20 साल बाद दुबारा ऐसा होगा। अमेरिकी नेशनल स्नो एंड आइस डेटा सेंटर द्वारा जमा की गई सैटेलाइट तस्वीरों से मालूम हुआ है कि 1 जून 2016 तक आर्कटिक समुद्र के सिर्फ़ 11.1 मिलियन स्क्वेयर किमी क्षेत्र में बर्फ़ शेष है। पुराने आंकड़े देखें तो बीते 30 सालों का औसत 12.7 मिलियन स्क्वेयर किमी था।
आर्कटिक समुद्र

आर्कटिक समुद्र की बर्फ़

Arctic ocean ice melting
संभावना जताई जा रही है कि सितम्बर 2016 तक यहाँ बर्फ़ 1 मिलियन स्क्वेयर किमी क्षेत्र में ही रह जाएगी। हर साल आर्कटिक समुद्र में सितम्बर महीने में बर्फ़ सबसे कम होती है और सर्दियों में फिर से जम जाती है।
पोलर ओसेन फ़िज़िक्स ग्रुप , कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर पीटर वडहम्स का कहना है कि नया डेटा उनके 4 साल पहले व्यक्त किए गए अनुमान की पुष्टि करता है।
आर्कटिक क्षेत्र में आर्कटिक महासागर, कनाडा का कुछ भाग, डेनमार्क का एक भाग, रूस का कुछ भाग, आइसलैंड, नॉर्वे, स्वीडन, फ़िनलैंड शामिल हैं।

बाढ़ और तूफ़ानों का ख़तरा

– आर्कटिक क्षेत्र से बर्फ़ ख़त्म होने से पृथ्वी पर तापमान बढ़ जाएगा। प्रो० वडहम्स की रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक तापमान में 0.6 डिग्री सेल्सियस बढ़ा है।
– समुद्र के जिन भाग से बर्फ़ समाप्त हो जाएगी वहाँ वाष्पीकरण अधिक होगा और ग्लोबल वार्मिंग की स्थिति और बिगड़ जाएगी।
– आर्कटिक क्षेत्र में बची हुई बर्फ़ कनाडा के उत्तरी तट के हज़ारों आइलैंड्स के बीच फंस जाएगी।
– ध्रुवीय क्षेत्रों में बढ़ती गर्मी के कारण ही बम साइक्लोन बनते हैं। जिनके कारण ब्रिटेन और अमेरिका में बेमौसम तूफ़ान आते हैं।
– रूस के उत्तरी तट की बर्फ़ भी ख़त्म हो रही है। आने वाले सालों में यहाँ से बर्फ़ समाप्त होने की संभावना है क्योंकि समुद्र जल का तापमान बढ़ रहा है।
Sources –

  • http://ecowatch.com/2016/04/08/arctic-sea-ice-2016/
  • http://nsidc.org/arcticseaicenews/

Keywords – Arctic Ocean, Artic Sea, Ice Melthing, Snow Melting, Global Warming, Bomb Cyclone