संतुलन द्वारा जीवन को व्‍यवस्थित करना

समय के साथ प्रगति की अनेक संभावनाएं पैदा हुई हैं। आगे निकल जाने की होड़ मची हुई है, खासकर युवा वर्ग की दौड़ सबसे तेज़ है। लक्ष्‍य सामने है, रास्‍ते बने-बनाए हैं, कुछ नए रास्‍ते बनाए जा रहे हैं। यह क्रम सृष्टि के अंत तक चलता रहेगा। आपसे पहले भी लोग हुए हैं और बहुत महत्‍वपूर्ण कार्य किए हैं, आपके बाद भी लोग होंगे और कई महत्‍वपूर्ण कार्य करेंगे। इसलिए जीवन में संतुलन बनाकर लक्ष्‍य तक पहुंचने की कोशिश करनी चाहिए। लेकिन पीछे छूट जाने का भय मनुष्‍य का दुश्‍मन बना हुआ है। बड़ी तेज़ी से भागते समय के साथ भाग रहे लोग अजीब उलझन में फँसते जा रहे हैं।

यह उलझन हमें तनाव से भर रही है, कुछ हासिल होना तो भविष्‍य पर निर्भर है लेकिन उसके पहले जो अनायास हासिल हो रहा है वह दु:खद है और लोगों को दु:ख, तनाव, अनिद्रा से भर रहा है। न खाने का सही समय रह गया है न सोने। केवल काम ही ज़िंदगी हो गई है। मनुष्‍य को स्‍वयं के बारे में सोचने की फ़ुर्सत नहीं हैं, वह मशीन की भांति चलता जा रहा है। इसकी वजह से बहुत ही कम उम्र में वह अनेक गंभीर बीमारियों की चपेट में आ जाता है, कुछ बीमारियाँ तो ऐसी होती हैं कि जिनका कोई इलाज ही नहीं होता, उनका केवल एक इलाज है कि आराम करो। पहले तेज़ काम, फिर बीमारियों ने घर किया तो पूरा आराम। जहाँ से चले थे, वहीं लौटकर खड़ हो गए। इसका सिर्फ़ इतना कारण है जीवन में संतुलन बनाकर नहीं चले।

जीवन में संतुलन

संतुलित जीवन की आवश्यकता

यदि जीवन में संतुलन होता तो समय से काम, समय से भोजन और समय से आराम। सबको बराबर तरजीह मिलती। न तो जल्‍दीबाज़ी होती और न ही अंधी दौड़, ऐसे में न तनाव आता और न ही अनिद्रा से पाला पड़ता। शरीर व मन स्‍वस्‍थ रहता और काम भी अपनी गति में चलता रहता। यदि सबसे आगे निकल जाने की होड़ में शरीर व मन गौड़ हो गया तो इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। इसलिए जीवन में संतुलन बहुत ज़रूरी है।

यदि हमारा स्‍वास्‍थ्‍य ठीक नहीं होगा, हमें भरपूर नींद नहीं आएगी, मानसिक अशांति बनी रहेगी तो हमारा काम भी प्रभावित होगा। एक साथ स्‍वास्‍थ्‍य भी गया और काम भी। इसलिए ज़रूरी है कि जीवन में संतुलन बनाकर आगे बढ़ने का प्रयास करते रहें। यहां यह भी बता देना चाहता हूँ कि प्रयास ही अपने हाथ में है, परिणाम अपने हाथ में नहीं है। इसलिए अपेक्षित परिणाम न मिलने पर किसी तरह की चिंता न लें और उसे स्‍वीकार करते हुए पुन: अपना प्रयास जारी रखें। लेकिन यह ध्‍यान ज़रूर दें कि इस प्रयास में संतुलन न बिगड़ने पाए।

संतुलन का अर्थ

संतुलन का अर्थ है कि सभी दैनिक कार्य नियमबद्ध तरीक़े से पूरे किए जाएं। इसके अलावा अन्‍य कार्यों की योजना बनाकर उन्‍हें चरणबद्ध ढंग से किया जाए। कार्य यदि चरणबद्ध ढंग से होंगे और दैनिक कार्य नियमबद्ध ढंग से होंगे तो जीवन बेतरतीब नहीं होगा, असंतुलित नहीं होगा, अस्‍त–व्‍यस्‍त नहीं होगा। मैंने ऊपर कहा है कि परिणाम की चिंता न लें अन्‍यथा आप निराश भी हो सकते हैं, अपेक्षित परिणाम न मिलने पर मन व्‍यथित हो सकता और तनाव को जन्‍म दे सकता है और तनाव से रक्‍तचाप, अल्‍सर, कैंसर, मधुमेह, हार्ट अटैक जैसी समस्‍या जन्‍म ले सकती है। इसलिए परिणाम से नहीं बल्कि अपने कार्य से संतुष्‍ट रहें, कार्य व प्रयास में कोई कोताही न बरतें, यदि कार्य से संतुष्‍ट हैं तो निश्चित रूप से परिणाम आपके पक्ष में आएगा।