कॉमेट 67पी पर ऑक्सीजन की पुष्टि रोसेटा यान ने की

लंदन में धूमकेतुओं का अध्ययन कर रहे अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने बड़ी सफलता हासिल की है। कॉमेट 67पी / चुरयुमोव-गेरासिमेंको (Comet 67P) पर रिसर्च में जुटी यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के रोसेटा यान (Rosetta Spacecraft) ने धूमकेतु 67पी पर पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन गैस होने के सबूत पेश किए हैं। धूमकेतू 67पी पर पानी की अपेक्षा ऑक्सीजन 1 से 10 प्रतिशत मात्रा में मौजूद है। वैज्ञानिक सम्भावना जता रहे हैं कि इस खोज के बाद सौरमंडल के बनने के कारणों पर और अधिक जानकारी मिल जाएगी। हो सकता है कि सौरमंडल के बारे में पुरानी विचार धारा टूट जाए।

रोसेटा यान की बड़ी सफलता

कॉमेट 67पी पर ऑक्सीजन मिली

Rosetta Finds Oxygen on Comet 67P

13 अगस्त को सूर्य के पास से गुज़रने वाले इस धूमकेतु के निर्माण में ऑक्सीजन गैस के शामिल होने की पूरी सम्भावना है। इस धूमकेतु का अध्ययन एक साल से भी अधिक समय से कर रहा है। इस अध्ययन में रोसेटा स्पेस क्रॉफ़्ट ने जो जानकारी इकट्ठा की है उसके अनुसार कॉमेट 67पी पर ऑक्सीजन गैस के अतिरिक्त कार्बन डाइ ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड, नाइट्रोजन, सल्फ़र और नोबेल गैसों के अतिरिक्त जलवाष्प भी उपस्थित है।

रोसेटा यान द्वारा एकत्र सैम्पलों की जाँच कर रही टीम प्रमुख कैथरीन अल्टवेग ने कॉमेट 67पी पर ऑक्सीजन गैस की मौजूदगी को आश्चर्यजनक बताया है, क्योंकि यह रासायनिक रूप से एक बेहद अभिक्रियाशील गैस है, जिसका धूमकेतु पर खोजा जाना एक बड़ी उपलब्धि है। ऑक्सीजन का ऐसे किसी धूमकेतु पर पाया जाना बहुत बड़ी सफलता है। इससे अंतरिक्ष पिंडों से जुड़ी रिसर्च में एक नया मोड़ आ गया है।

यह ऐसी पहली घटना है जिसमें किसी पृथ्वी के अतिरिक्त अन्य अंतरिक्षीय पिंड पर ऑक्सीजन पायी गयी है। अब तारों पर हुए रिसर्च में भी किसी तारे पर ऑक्सीजन होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। इसलिए धूमकेतु 67पी पर ऑक्सीजन मिलना एक आश्चर्य ही है। रोसेटा यान ने सितम्बर 2014 से मार्च 2015 तक 3000 हज़ार से भी ज़्यादा सैम्पल्स एकत्र करके भेजे हैं और इनका अंतरिक्ष वैज्ञानिक इनका गहन अध्ययन करने में जुटे हैं।

उम्मीद है कि हम कौन हैं, हम कहाँ से आये हैं और हमारी उत्पत्ति कैसे हुई? इसकी जानकारी हमें जल्द ही मिल जाए।