अब तक जिन लोगों को भी हड्डी टूटने की समस्या से गुज़रना पड़ा है, उन्हें हड्डी जोड़ने के लिए जोखिम भरे परम्परागत ऑपरेशन कराने पड़े हैं। अब आगे से लोगों को वैसे किसी जोखिम भरे ऑपरेशन नहीं कराने होंगे। भारतवंशी और उनकी रिसर्च टीम ने एक बिल्कुल ही नयी तकनीक विकसित की है, जिससे टूटी हड्डी का घाव मक्के भर दिया जाएगा।

टूटी हड्डी का इलाज

टूटी हड्डी का घाव मक्के से भरने की तकनीक

बोन ट्रांसप्लानटेशन या अस्थि प्रत्यारोपण में भी यह रिसर्च बहुत कारगर साबित होगी। इस शोध में मक्का के स्टार्च का उपयोग करके ऐसा बायोडिग्रेडेबल पॉलीमर बनाया गया है, जिसे मॉन्टमोरिलोनाइट क्ले नैनो पार्टिकल के साथ मिलाकर टूटी हड्डी की फ़िलिंग की जाती है। यह पॉलीमर नयी प्राकृतिक रूप से शरीर में बनने वाली हड्डी के बनने की प्रकिया के दौरान 18 महीनों में गलकर ख़त्म हो जाता है। अंत में टूटी हड्डी का घाव भर जाता है और वह जुड़ जाती है।

परम्परागत तरीक़ों की जगह यह बहुत सरल तकनीक है। जिसमें टूटी हुई हड्डी को जोड़ने के शरीर के दूसरे हिस्सों से हड्डी निकालकर नहीं जोड़नी पड़ती है। बल्कि हड्डी जोड़ने में की गई फ़िलिंग गलकर ख़ुद ख़त्म हो जाती है। ऐसा करने से पुरानी तकनीक में जिस जगह से हड्डी ली जाती थी, उस भाग में परेशानी होने की सम्भावना रहती थी। वो समस्या अब आगे नहीं होगी।

ये तकनीक हमारे नज़दीक़ी अस्पतालों में जल्द ही आ जाये, ताकि पेशेंट्स को कड़ी तक़लीफ से न गुज़रना पड़े।

यह रिसर्च सचमुच बड़े कमाल की है। किसने सोचा था कि मक्का के स्टार्च कभी इस तरह काम आएगा। आप इस शोध के बारे में अगर कुछ कहना चाहें तो कमेंट बॉक्स का प्रयोग करें। हमें आपकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार रहेगा।

थोड़ा सा समय निकाल इस कमाल की रिसर्च के बारे में सोशल मीडिया पर शेअर करें, ताकि सभी को इस महत्वपूर्ण रिसर्च की जानकारी हो सके।