जमालगोटा के फायदे और नुकसान

Jamalgota ke fayde nuksan: जमालगोटा एक औषधीय पौधा है। इसको कुम्भिबीज, जयपाल, चक्रदत्त बीज आदि के नाम से जाना जाता है। जमालगोटा को अंग्रेजी में Purgative Croton / परगेटिव क्रोटन कहते हैं। जमालगोटा एक लाल, भूरे और काले रंग का बीज है। इसके बीज का स्वाद कटु होता है। यह गर्म प्रकृति का बीज है। गर्म गुण के कारण यह शरीर में पित्त को बढ़ाता है। यह पाचन शक्ति को भी ठीक रखने में सहायक है। इसमें खून साफ़ करने और त्वचा रोगों में लाभ पहुँचाने के भी गुण मौजूद हैं। इसका कटु रस गर्म, हल्का, पसीना लाने वाला, कमज़ोरी लाने वाला और प्यास बढ़ाने वाला होता है। यह रस कफ रोगों में बहुत लाभकारी है। आयुर्वेद में जमालगोटे पौधे का बीज और उनसे निकलने वाले तेल का उपयोग करा जाता है। आइए इस लेख में जमालगोटा के फायदे और नुकसान जानते हैं।

जमालगोटा को शुद्ध करने की विधि

जमालगोटा में कई दोष व्याप्त होते हैं। इन दोषों को समाप्त करके ही इसका उपयोग औषधीय रूप में प्रयोग किया जाता है। जमालगोटा में व्याप्त दोष को दूर करने के लिए इसके बीज को दो भागों में काटकर गाय के दूध में लगभग 3 घंटे के लिए गर्म करा जाता है। दूध को तब तक गर्म करे जब तक इसमें चिकनाई खत्म न हो जाए, जब इसमें चिकनाई खत्म हो जाए तब समझें यह शुद्ध हो गया है। फिर मिट्टी की प्लेट में बीजों को रखकर सूरज की रोशनी में सुखाया जाता है। यदि इसके बीजों को उपयोग बिना शोधन के किया जाए तो यह भयानक उलटी और दस्त का कारण भी बन सकता है, इसीलिए आयुर्वेद में इन बीजों का उपयोग शोधन करके ही किया जाता है।

जमालगोटा के सेवन करने की मात्रा

जमालगोटा के शोधित बीजों का उपयोग 6-12 mg की मात्रा में लिया जा सकता है और जमालगोटा तेल की केवल एक बूँद की मात्रा को उपचार के लिए उपयोग किया जा सकता है। ध्यान रहे औषधीय उपचार व सेवन के लिए केवल जमालगोटा के शुद्ध (शोधित) बीजों का ही उपयोग करें।

जमालगोटा के फायदे

जमालगोटा के उपयोग या जमालगोटा के फायदे

1. चर्म रोग

नारियल के तेल में जमालगोटा को पीसकर लेप बना लीजिए और फिर इस लेप को त्वचा पर लगाए। इससे चर्मरोग या त्वचा से जुड़े रोग ख़त्म हो जाते हैं।

2. सिर दर्द

सिर दर्द होने पर जमालगोटा के बीज को पीसें, पेस्ट बनाकर माथे पर लगाएं। इससे सिर का दर्द दूर हो जाता है। ध्यान रहे जमालगोटा के बीज के पेस्ट को कुछ समय बाद माथे से पोंछकर घी लगा लें नहीं तो जलन होने लगेगी।

3. आँतों के कीड़े

आँतों के कीड़ों को नष्ट हों तो 10 मिलीग्राम जमालगोटा के बीज को गर्म पानी के साथ सेवन करें। इससे आँतों के कीड़े नष्ट होते हैं।

4. बिच्छू का दंश

जमालगोटा को पानी में घिसकर काटे हुए हिस्से पर लगाएं। इससे बिच्छू का दंश ठीक हो जाता है।

5. नपुंसकता

जमालगोटा के तेल से लिंग की मालिश करें। इससे नपुंसकता दूर होती है और मैथुनशक्ति बढ़ती है।

6. फोड़े-फुंसियां और घाव

जमालगोटा और एरण्ड के बीज को बराबर की मात्रा में लेकर पीस लें। फिर इस पेस्ट में थोड़ा सा पानी मिलाकर लेप बना लें। इस लेप को फोड़े-फुंसी और घाव पर लगाएं। इससे फोड़े-फुंसी और घाव ठीक हो जाते हैं।

7. गठिया रोग

जमालगोटा के तेल से गुठनों की मालिश करें। इससे गठिया रोग में लाभ मिलता है।

जमालगोटा के नुकसान

जमालगोटा का गलत मात्रा में सेवन दस्त और उल्टी का कारण बनता है। इससे पेट में जलन भी होती है। आँतों में जलन व घाव हो जाते हैं इसीलिए इसका उपयोग कम से कम मात्रा में ही करना चाहिए।

ध्यान रहे

1. अगर किसी ने विषैले जमालगोटे का सेवन कर लिया है तो जमालगोटे के विषैले प्रभाव को समाप्त करने के लिए गर्म पानी पिए या फिर शहद या दही या मट्ठे का सेवन करे। इससे विष का प्रभाव समाप्त हो जाएगा।
2. जमालगोटा का गर्भावस्था में कभी भी सेवन न करें।
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