आज की इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी में हर कोई तनाव ग्रस्त है, जिस कारण से मनुष्य का स्वभाव काफ़ी चिड़चिड़ा हो गया है। जिस कारण से उसके आपसी रिश्तों मे भी दरारें पड़ जाती हैं। ऐसे मे ज़रूरी है कि मनुष्य अपनी ज़िंदगी मे योग को अपनाये। योग को नियमित रूप से करने से मानसिक शांति मिलती है और मन के साथ साथ तन भी स्वस्थ रहता है। आज ऐसे ही एक आसन सुखासन करने की विधि के बारे मे जानेंगे। जिसको नियमित रूप से करने से आपको कई लाभ प्राप्त होंगे। सुखासन का शाब्दिक अर्थ है सुख देने वाला आसन, यह आसन बहुत ही आसान है।

सुखासन विधि - Sukhasana steps

सुखासन करने की विधि । Sukhasan Steps

  1. सुखासन करने के लिए भूमि पर दरी या मैट बिछाकर बैठ जाएँ।
  2. अब दोनों पैर सामने और सीधे रखें।
  3. फिर एक पैर की एड़ी अपने दूसरे पैर की जंघा के नीचे लें आयें और यही क्रम दूसरे पैर के साथ करें। (पालथी मोड़ कर बैठ जाएँ)
  4. अब आप अपनी पीठ और मेरूदंड को सीधा करें। ध्यान रहे कि अधिक झुक कर न बैठें।
  5. कंधों को थोड़ा ढ़ीला छोड़ें, अब गहरी सांस अन्दर की ओर ले फिर धीरे धीरे सांस को छोड़ें।
  6. हथेलियों को एक के ऊपर एक अपनी पालथी पर रखें।
  7. सिर को थोड़ा ऊपर उठायें और आखे बंद कर लें।
  8. अपना ध्यान अपनी श्वसन क्रिया पर लगायें, लम्बी गहरी साँस लेते रहें।
  9. अगर प्रारम्भ में कठिनाई आती है तो आप दीवार से टिक कर बैठ सकते हैं।

सही समय: कभी भी एकांत में
दिशा: अगर अध्यात्मिक दृष्टी से योग कर रहे हैं तो उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख रखें।

सुखासन के लाभ

  1. इस आसन के नियमित अभ्यास से आपको मानसिक सुख और शांति की भी अनुभूति होगी।
  2. अगर आप चिंता, अवसाद या अति क्रोध से ग्रस्त हैं, तो इस आसन को करने से बहुत लाभ प्राप्त होगा।
  3. इस आसन को करने से चित्त शांत और मन एकाग्रचित्त होता है।
  4. यह आसन बैठने की आदत को सुधारता है।
  5. यह आसन मानसिक चंचलता को भी कम करता है।
  6. यह आसन मेरुदंड (रीढ़ की हड्डी) की परेशानियों से भी मुक्ति दिलाता है।

सावधानियाँ

  1. जिन लोगों को घुटनों के जोड़ों में परेशानी हो, वे लोग यह आसन न करें या किसी एक्स्पर्ट के निगरानी में योग करें।
  2. रीढ़ की हड्डी में किसी तरह की चोट हो तो सावधानी पूर्वक करें कोशिश करें, अधिक लम्बे समय तक न बैठें।
  3. अपने शरीर की प्रतिक्रिया को समझ कर उसके अनुरूप आसन करें।