शंखपुष्पी एक आयुर्वेदिक वनस्पति है। इसके फूल शंख के समान सफेद होते हैं, जिस कारण इसे शंखपुष्पी कहते हैं। शंखपुष्पी शांतिदायक और बुद्धिवर्धक वनस्पति है। यह मानसिक रोगों को दूर करने वाली, मस्तिष्क को शक्ति प्रदान करने वाली उत्तम औषधि है। ज्वर तथा अनिद्रा रोग में इसका प्रयोग बहुत लाभदायक है। शंखपुष्पी की इन्हीं गुणों के कारण आयुर्वेद में उसे एक औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है। आइए आज शंखपुष्पी के गुण और उसके प्रयोग की जानकारी पर बात करते हैं –

शंखपुष्पी के गुण व लाभ

शंखपुष्पी का परिचय

  1. शंखपुष्पी को संस्कृत में शंखपुष्पी, क्षीरपुष्पी, शंखमालिनी आदि कहते हैं।
  2. हिंदी में इसे शंखाहुली, शंखपुष्पी, कौडिल्ला, कौड़ियाल आदि कहते हैं।
  3. इसका लैटिन नाम क्लीटोरिया टर्नेटिया लिन्न हैं।

शंखपुष्पी के गुण

  1. शंखपुष्पी बुद्धिवर्धक, आयुवर्द्धक, मानसिक रोगों को दूर करने वाली तथा उत्तम रसायन है।
  2. यह स्वाद में कसैली, स्मरणशक्ति को बढ़ाने वाली, शीतल तथा वाणी को मधुर बनाने वाली है।
  3. इसका सेवन करने से पाचक अग्नि तेज़ होती है, कुष्ठ व कृमियों का नाश होता है और पित्त का शमन होता है। यह मिर्गी रोग की उत्तम औषधि है।

मस्तिष्क पर प्रभाव

शंखपुष्पी के गुण जिनसे मस्तिष्क को लाभ प्राप्त होता है –

  1. मस्तिष्क को शक्ति देने वाली जितनी वनस्पतियां हैं। उनमें शंखपुष्पी, ब्राह्मी और बच ये तीनों प्रधान हैं, क्योंकि यह स्मरण शक्ति की कमज़ोरी यानि मुख्य रूप से मस्तिष्क संबंधित रोगों में विशेष लाभ प्रदान करती हैं।
  2. कुछ वैज्ञानिक शोध के अनुसार शंखपुष्पी में मानसिक उत्तेजना को कम करने के गुण होता है।
  3. शंखपुष्पी अपने उत्तेजना शामक गुणों के कारण तनाव से उत्पन्न उच्च रक्तचाप जैसे रोगों में भी लाभदायक है। साथ ही तनाव को कम कर शांत या आरामदायक नींद भी प्रदान करती है।

थायराइड ग्रंथि पर प्रभाव

  1. थायराइड ग्रंथि के अतिस्त्राव से उत्पन्न घबराहट, अनिद्रा तथा कम्पन्न जैसी उत्तेजना को नियंत्रित करने की शक्ति शंखपुष्पी में विद्यमान है।
  2. यह औषधि थायराइड की कोशिकाओं पर प्रभाव डालकर उसके स्राव को संतुलित करती है।

शंखपुष्पी का औषधीय उपयोग

1. स्मरण शक्तिवर्द्धक चूर्ण

अक्सर बच्चे जो पढ़ते हैं, कुछ समय बाद उसे भूल जाते हैं। जिससे उनके परीक्षा में नंबर कम आते हैं। इसी प्रकार कुछ लोग चीज़ों को रखकर भूल जाते हैं कि वह चीज़ उन्होंने कहाँ रखी है, यानि जिनकी स्मरण शक्ति क्षीण हो रही हो, वे शंखपुष्पी के चूर्ण का सेवन अवश्य करें। इससे आपको बेहतर स्मरण शक्ति प्राप्त होगी।

2. उच्च रक्तचाप में लाभकारी

छाया में सुखाई हुई शंखपुष्पी 250 ग्राम, जटामांसी 150 ग्राम इन दोनों को अच्छी तरह से पीसकर चूर्ण बनाकर सुखा लें। अब 3 से 5 ग्राम की मात्रा में दिन में 3 बार ताजे जल के साथ सेवन करे इससे आपको उच्च रक्तचाप में अत्यंत लाभ मिलेगा।

3. मलेरिया

मलेरिया होने पर शंखपुष्पी की जड़ का चूर्ण अति लाभकारी हैं।

शंखपुष्पी चूर्ण बनाने की विधि

छाया में सुखाया हुआ शंखपुष्पी का पंचांग 125 ग्राम और काली मिर्च 10 ग्राम लेकर इनका चूर्ण बनाएं। इसमें 125 ग्राम मिश्री का चूर्ण मिलाएं। इस चूर्ण को प्रतिदिन 2 से 5 ग्राम की मात्रा में लेकर तथा बच्चे के लिए 1 से 2 ग्राम की मात्रा सुबह शाम दूध के साथ सेवन करने से लाभ मिलेगा और इसके नियमित सेवन से स्मरण शक्ति बलिष्ठ होती है।

शंखपुष्पी तेल बनाने की विधि

ताज़ी शंखपुष्पी का रस 250 ग्राम अथवा शंखपुष्पी 250 ग्राम पीसकर गाढ़ा घोल बनाएं। इसमें 250 ग्राम तिल का तेल डालकर धीमी आंच पर पकाएं और जब पानी जल जाएं और केवल तेल ही रह जाएं तो उतार कर छान लें। इस तेल का प्रयोग छोटे बच्चों के लिए बहुत ही लाभकारी है। इस तेल के उपयोग से बच्चे हष्ट, पुष्ट और चैतन्य होते हैं। यह तेल सूखा रोग और रिकेट्स में भी अत्यंत लाभकारी है।

आप शंखपुष्पी के इन उपयोगी गुणों के बारे में जानकर ख़ुद भी लाभान्वित हों और दूसरों को भी लाभान्वित करें।

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