जैसे जैसे बच्चे किशोरावस्था इस उम्र में प्रवेश करते हैं, वैसे वैसे उनकी समस्याएं बढ़ने लगती हैं और क़दम डगमगाने लगते हैं। शारीर में हो रहे हार्मोंस बदलाव के कारण किशोर किशोरियाँ को अपने बारे में कंफ़्यूज़ हो जाते हैं। टीनएजर्स में उत्पन्न इन समस्याओं को नज़रअंदाज़ करना बिलकुल ठीक नहीं हैं। क्योंकि यही टीनएजर्स आने वाले कल का भविष्य हैं। इसलिए टीनएजर्स का कंफ़्यूज़न दूर करके सही मार्गदर्शन करना बेहद ज़रूरी है। ताकि समाज में तेज़ी से बढ़ते अपराधों को रोका जा सकें। आज सबसे ज़्यादा टीनएजर्स ही ग़लत संगति या किसी हताशा कारण सफलता के लिए अनुचित मार्ग का चयन कर लेते हैं। जिसके गम्भीर परिणाम आ सकते हैं। इसलिए सही समय में सचेत हुआ जाए तो सबकुछ ठीक रह सकता है।

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टीनएजर्स का कंफ़्यूज़न

टीनएजर्स का कंफ़्यूज़न दूर करने के उपाय

किशोरावस्था में टीनएजर्स का कंफ़्यूज़न दूर करना परिवार, स्कूल टीचर और समाज की ज़िम्मेदारी है। सभी के सहयोग से आप उन्हें उचित मार्ग पर अग्रसित कर सकते हैं। आइए जानते हैं किस तरह से आप और हम इनकी मदद कर सकते हैं –

1. ज़रूरी है कि माता पिता टीनएजर्स की हर बात और सभी समस्याएँ सुनें ताकि उन्हें कभी अकेला न महसूस हो। उनको किसी अपने के साथ होने का मनोबल मिलता रहे। उनकी मदद करने के लिए व सही गाइडेंस देने के लिए इस उम्र में उनको दोस्त बनाना बेहद ज़रूरी हैं।

2. समय समय पर टीनएजर्स को समय देना, उनके साथ दोस्त बनकर रहना, उन्हें सुनना और समझना बेहद ज़रूरी है। इससे आप यह जान सकते हैं कि आपका बच्चा क्या सोचता है? उसके दोस्त व दोस्तों की संगति कैसी है? ऐसा करके आपको अपने बच्चे के बारे में सही जानकारी मिल सकेगी। और आप उसके क़दम डगमगाने से पहले ही उसे सम्भाल लेंगे।

3. टीनएजर्स अपनी उम्र में अत्यंत भावुक होते हैं। उन पर किस बात का अनुकूल या प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, इसे जानना आवश्यक है। इसलिए कुछ भी कहने से पहले सम्भावित परिणाम क्या हो सकता है, इस पर ज़रूर गौर करें।

4. टीनएजर्स को ज़्यादा रोक टोक करना बिलकुल भी पसंद नहीं आता है। इसलिए उन पर ज़्यादा रोक टोक न करने की बजाय उन्हें मर्यादा का बोध अवश्य कराएं। जिससे वे सभ्य समाज के निर्माण में अपना योगदान कर सकें और ऐसा कोई भी कार्य न करें जिससे उनकी बदनामी हो।

5. समय समय पर टीनएजर्स को घर की वर्तमान परिस्थितियों से अवश्य अवगत कराना चाहिए। ताकि वे दूसरों की बराबरी या उनकी देखा देखी करने से बचें। बराबरी करने का नेचर बच्चों पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है, इसलिए उन्हें ऐसा करने से बचाना हम सभी की ज़िम्मेदारी है।

6. यूँ तो अपनी ही बच्चों की जासूसी करना ग़लत बात है। लेकिन यह ज़रूरी भी है, सीमा रहकर की जाने वाली जासूसी निगरानी कहलाती है। इसलिए बच्चे के घर से बाहर आने जाने का समय निश्चित रखें और कभी कभार उनका पीछा करके यह भी देखें कि वे कहाँ जाते हैं और किससे मिलते हैं? ऐस करने से आप उन्हें बुरी संगति से दूर रखने के लिए सही गाइडेंस कब देना है यह जान पाएंगे।

7. भविष्य में वे क्या बनना चाहते हैं? उनकी इस इच्छा को ज़रूर जानने की कोशिश करें। उन पर अपनी इच्छा व सपनों को थोपने की कोशिश बिलकुल भी न करें। इससे प्रतिकूल प्रभाव की सम्भावना अधिक होती है।

8. लगभग सभी टीनएजर्स अपने माता-पिता और टीचर्स से चाहते हैं कि वो उनपर विश्वास करें और उनका साथ दें। इसलिए किसी ग़लती पर सीधे डाँटने या मारने की बजाय आप उन्हें उनकी ग़लती को अप्रत्यक्ष रूप से समझाने का प्रयास करें। जिससे वे उसका बोध कर सकें और ख़ुद सुधार लाना चाहें।

इस तरह से समय समय पर आप के द्वारा सही गाइडेंस टीनएजर्स का कंफ़्यूज़न दूर करके उन्हें एक सही दिशा दे सकता है। जो कि इस उम्र के बच्चों के लिए बेहद ज़रूरी हैं।