लड़कियों में माहवारी का प्रारंभ होना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। जो हर महीने नियत रूप से होती है। इसका अनुभव भी हर लड़की में अलग अलग रूप में होता है – जैसे पेट दर्द, कमर दर्द और सर दर्द आदि की समस्या का अनुभव होना। लेकिन गर्भावस्था और वृद्धावस्था के समय महिलाओं में माहवारी नहीं होती। लेकिन किसी कारणवश अगर महिला में सामान्य अवस्था में माहवारी बिना किसी कारण बंद हो जाए, तो इसे माहवारी का अभाव कहते हैं। यह समस्या हार्मोन में होने वाले बदलाव के कारण भी हो सकती है। इसी प्रकार अनियमित माहवारी भी हो सकती है। आइए इसके बारे में जानते हैं –

अनियमित माहवारी का अर्थ

माहवारी चक्र के समय में परिवर्तन का होना अनियमित माहवारी कहलाता है। अनियमित माहवारी के लक्षण – जल्दी-जल्दी माहवारी का आना, दाग़ लगना, रक्त के थक्कों का आना आदि हैं।

माहवारी के समय में कई बार रक्तस्त्राव बहुत अधिक हो जाता है और कई बार बिलकुल भी नहीं होता। कभी कभी ऐसा भी होता है कि ये बहुत दिन बाद आता है या फिर कभी कभी जल्दी जल्दी आता है।

अनियमित माहवारी का घरेलू इलाज

अनियमित माहवारी में क्या करें क्या न करें

1. मासिक चक्र की अनियमिता की जितनी भी समस्याएँ हैं। अशोक के पेड़ के पत्तों की चटनी इसका रामबाण उपाय है। जो इस समस्या में बेहद गुणकारी है।

अशोक के पत्तों की चटनी बनाने के लिए 5-6 पत्ते को पीस कर चटनी बना लें। अब इसे 1 गिलास पानी में कुछ देर उबाल लें। जब पानी आधा गिलास से कम रह जाए तब उसे सुबह खाली पेट पिएं। इसे पीने से लाभ मिलेगा। इसको पीने से नुकसान कोई नहीं है। इसका सेवन आप 30 दिनों तक कर सकती हैं।

2. पीरियड्स के समय में होने वाला कमरदर्द ,सिर दर्द , पेट दर्द, पीठ मे दर्द, जंघों मे दर्द, चक्कर आना ,नींद ना आना तथा बेचैनी होना आदि समस्या होने पर दर्द निवारक दवा लेने से बचे क्योंकि इनके साइडइफ़ेक्ट भी होते है।

अक्सर इस समस्या में घरेलू उपचार करने पर राहत मिल जाती है, लेकिन अगर घरेलू उपचार से राहत न मिलें तो पेट के निचले हिस्से को गर्म हीटिंग पैड या गर्म पानी की बोतल से सेंके। इससे आपको दर्द में आराम मिलती है।

मासिक धर्म में दर्द की सबसे अच्छी दवा गाय का शुद्ध देशी घी है। एक चम्मच गाय के घी को एक गिलास गर्म पानी मे डालकर पीने से उन दिनों के दर्द में राहत मिलती है। अतः एक गिलास पानी को खूब गर्म करें फिर उसमें एक चम्मच गाय का घी डालें, फिर थोड़ा ठंडा होने पर इसे पीने से राहत मिलती है। यह ज़रूर ध्यान रहे कि घी देशी गाय का ही होना चाहिए, भैंस का नहीं।

3. महिलाओं को अक्सर पीरियड्स के दौरान ज़्यादा से ज़्यादा आराम करने के लिए कहा जाता है। उन्हें बताया जाता है कि माहवारी में व्यायाम भी न करें। लेकिन ऐसा नहीं है, माहवारी के समय में साधारण व्यायाम करना लाभकारी होता है।

खाने पीने में आप हरी पत्तेदार सब्ज़ियों और दालों का सेवन करें और इस समय जंक फ़ूड और ज़्यादा नमक मिर्च वाला खाना खाने से बचें।

समस्या में सुधार न दिखे तो किसी अच्छे डॉक्टर से परामर्श अवश्य ले लीजिए।

loading...