अश्वगंधा जिसके नाम का अर्थ है अश्व की गंध। अश्वगंधा से घोड़े के पसीने जैसी गंध आती है जिस कारण से इसका नाम अश्वगंधा पड़ा है। आयुर्वेद में इसकी जड़ औषधि के रूप में प्रयोग की जाती है। इसकी जड़ को सुखाकर ही इसको उपयोग में लाया जाता है। इसका एक वर्ष तक सेवन करने से शरीर रोग रहित होता है तथा वृद्धावस्था दूर होकर शरीर नवयौवन को प्राप्त होता है। इसके अलावा अश्वगंधा की जड़ के चूर्ण या अश्वगंधा चूर्ण के सेवन से कई फ़ायदे होते हैं जो इस प्रकार है…

अश्वगंधा चूर्ण स्रोत

अश्वगंधा चूर्ण के फ़ायदे

1. अवसाद से मुक्ति

आयुर्वेद में अश्वगंधा का उपयोग शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए तथा अवसाद से मुक्ति पाने के लिए उपयोग किया जाता है।

2. ज्वर / बुख़ार

10 ग्राम गिलोय की छाल के चूर्ण में 10 ग्राम अश्वगंधा की चूर्ण को मिलाकर प्रतिदिन शाम को एक गिलास गरम पानी के साथ सेवन करने से तेज बुख़ार भी दूर हो जाता है।

3. घाव भरने में उपयोगी

अश्वगंधा की जड़ के चूर्ण को पानी के साथ मिलाकर पेस्ट बना लें। फिर इस पेस्ट को घावों पर लगाएं। इससे बहुत आराम मिलेगी और घाव भी जल्दी भर जाएगा।

4. कृमि रोग में

1 चम्मच शहद में 1 चम्मच गिलोय का चूर्ण और 1 चम्मच अश्वगंधा के चूर्ण को मिलाकर नियमित सेवन करने से पेट के सभी कीड़े मर जाते हैं और आपको कृमि रोग से छुटकारा मिलता है।

5. वीर्य की गुणवत्ता में सुधार

1 गिलास दूध में 1 चम्मच चीनी और 20 ग्राम अश्वगंधा की जड़ के चूर्ण को मिलाकर पका लें। जब यह हल्का ठंडा हो जाए तब इसको रोजाना रात को सोने से पहले सेवन करें। इसके सेवन से शुक्राणुओं की संख्या में वृद्धि होती है और वीर्य की गुणवत्ता में सुधार होता है।

6. मासिक-धर्म

50 ग्राम अश्वगंधा के जड़ के चूर्ण में 50 ग्राम चीनी मिला लीजिए। फिर इस मिश्रण को आधे गिलास पानी के साथ खाली पेट मासिक धर्म शुरू होने से लगभग एक सप्ताह पहले सेवन करें और मासिक धर्म शुरू होने पर इसका सेवन बंद कर दें। इसके सेवन से मासिक धर्म के सभी विकार नष्ट हो जाते हैं।

7. मधुमेह

मधुमेह रोगी के लिए इसका सेवन बहुत लाभदायक है। इसके सेवन से रक्त शर्करा के स्तर में काफी कमी आती है। जिससे मधुमेह रोगी को स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है।

8. गठिया रोग

सुबह शाम एक चम्मच अश्वगंधा चूर्ण को गरम दूध के साथ पीने से गठिया के रोगी को आराम मिलता है और जोड़ों के दर्द से छुटकारा मिलता है।

अश्वगंधा जड़
Ashwagandha Roots, अश्वगंधा की जड़

9. कमर दर्द

1 चम्मच अश्वगंधा की जड़ के चूर्ण को गाय के घी या शक्कर के साथ चाटने से कमरदर्द में लाभ होता है।

10. ताकत प्रदान करें

1 छोटे चम्मच अश्वगंधा के चूर्ण को शहद में मिलाकर सुबह-शाम एक गिलास दूध के साथ पीने से शरीर की कमजोरी दूर होती है और आपके शरीर को ताकत मिलती है।

11. क्षयरोग (टी.बी.)

4 ग्राम अश्वगंधा की जड़ के चूर्ण में 2 ग्राम बड़ी पीपल का चूर्ण, 10 ग्राम घी और 20 ग्राम शहद मिलाकर सेवन करने से क्षय रोग (टी.बी.) ख़तम हो जाता है।

12. प्रदर

1 चम्मच अश्वगंधा की जड़ के चूर्ण को और 1 चम्मच शतावर के चूर्ण को मिलाकर आधे गिलास पानी के साथ सेवन करने से प्रदर रोग में लाभ होता है।

13. कैंसर

एक शोध के अनुसार अश्वगंधा के चूर्ण के सेवन से कैंसर जैसे रोग से बचाव रहता है।

अश्वगंधा के चूर्ण के नुकसान

– आवश्यकता से अधिक मात्रा में इसका सेवन करना सेहत के लिए हानिकारक है।

– गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

– गरम स्वभाव वालों के लिए अश्वगंधा का अधिक मात्रा में उपयोग हानिकारक होता है।

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