यूरिक एसिड – हड्डियों में दर्द का कारण

यूरिया ही यूरिक एसिड या यूरिक अम्‍ल में बदलकर हड्डियों में जमा होने लगती है और दर्द शुरू हो जाता है। ऐसा तब होता है जब किडनी के पानी छानने की क्षमता में कमी आ जाती है और यूरिया ही यूरिक एसिड में तब्‍दील होने लगता है। यहीं से गठिया आदि की शुरुआत हो जाती है।

कैसे बनता है यूरिक एसिड

प्‍यूरिन के टूटने से यूरिक एसिड का निर्माण होता है। आमतौर पर यूरिक एसिड पेशाब के रास्‍ते शरीर से बाहर निकल जाता है परंतु किसी कारण से जब यूरिक एसिड शरीर में रह जाता है और धीरे-धीरे इसकी मात्रा में वृद्धि होने लगती है तब नुकसानदायक हो जाता है।

यूरिक एसिड टेस्ट
Uric acid test

यूरिक एसिड के बारे में जानें

नाइट्रोजन, हाइट्रोजन, कार्बन व ऑक्सीजन का योग जिसका अणु सूत्र C5H4N4O3 है। विषमचक्रीय यह योग शरीर को प्रोटीन से एमिनोअम्ल के रूप में मिलता है, इसे चार प्रमुख वर्गों में विभाजित किया गया है।

1- उदासीन ऐमिनो अम्ल
2- अम्लीय ऐमिनो अम्ल
3- क्षारीय ऐमिनो अम्ल
4- विषमचक्रीय ऐमिनो अम्ल

यह लवण व आयनों के रूप मे यूरेट और एसिड यूरेट जैसे अमोनियम एसिड यूरेट (Ammonium acid urate) के रूप में शरीर में मौजूद है। प्रोटीन एमिनो एसिड के संयोजन से बना होता है। पाचन की प्रक्रिया के दौरान जब प्रोटीन टूटता है तो शरीर में यूरिक एसिड (Uric-Acid) बनता है। जब शरीर मे Purine nucleotides टूट जाती है तब भी यूरिक एसिड बनता है। प्युरीन क्रियात्मक समूह होने के कारण यूरिक अम्ल Aromatic compound होते हैं. शरीर में Uric-Acid का स्तर बढ़ जाने की स्थिति को (hyperuricemia) कहते हैं।

प्रोटीन के बारे में जानें

इसके साथ ही प्रोटीन की उपलब्‍धता कहां से होती है और यह शरीर के लिए क्‍यों ज़रूरी है, इसके बारे में भी जानना ज़रूरी है। किसी भी जीव के लिए प्रोटीन एक ज़रूरी आहार है। यह बॉडी बिल्डिंग व बॉडी रिपयेरिंग का कार्य करता है। नई कोशिकाओं व नए ऊतकों के निर्माण में इसकी महत्‍वपूर्ण भूमिका होती है। साथ ही पुरानी कोशिकाओं व उनके क्षतिग्रस्‍त ऊतकों की यह मरम्‍मत भी करता है। प्रोटीन यदि पर्याप्‍त मात्रा में शरीर को न मिले तो शरीर कमजोर हो जाता है और कई रोगों की आशंका जन्‍म ले लेती है।

प्रोटीन ऊर्जा का स्रोत है, इससे शरीर को पर्याप्‍त ऊर्जा प्राप्‍त होती है, शिशुओं, बच्‍चों, किशोरों, वृद्धों व गर्भवती महिलाओं के लिए इसकी सर्वाधिक ज़रूरत होती है। 25 वर्ष की आयु के बाद यदि शारीरिक परिश्रम ज़्यादा न हो तो अधिक प्रोटीन नहीं लेना चाहिए। इससे यूरिक अम्लों (Uric-Acid) की आशंका बढ़ जाती है। रेड मीट, सी-फूड, रेड वाइन, दाल, राजमा, मशरूम, गोभी, टमाटर, मटर, पनीर, भिंडी, अरवी व चावल अधिक मात्रा में लेने से भी यूरिक एसिड बढ़ जाता है।

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