टीकाकरण से बच्‍चों को भयावह संक्रामक रोग जैसे खसरा, टेटनस (धनुष बाय), पोलियो, क्षय रोग, गलघोंटू, काली खांसी, हेपेटाईटिस बी, तपेदिक, कॉलरा, हेपेटाइटिस ए, मोतीझरा (टाइफाइड), कंठमाला का रोग (मम्प्स), रुबेला, जठरांत्र शोथ या गैस्ट्रोएंट्राइटिस (रोटावायरस) जैसे गम्भीर रोगों से बचाया जाता है। इसलिए चिकित्सक से शिशु टीकाकरण चार्ट को बनवाकर अपने कमरे में ज़रूर लगा लें ताकि कोई भी टीका छूटे नहीं। आइए सम्पूर्ण टीकाकरण तालिका के बारे में जानें कि बच्चो को कौन सा टीका किस माह में देना है…

शिशु टीकाकारण
Infant vaccination

शिशु टीकाकरण तालिका

गर्भव‍ती महिला गर्भ में पल रहे बच्‍चे को टिटनेस की बीमारी से बचाने के लिये टीका अवश्य लगवाएं।

शिशुओं को जन्म के समय दिए जाने वाले टीके

1 1/2 माह में शिशु टीकाकरण

शिशुओं को 1 1/2 माह की आयु में निम्न टीकों की प्रथम खुराक ज़रूर दिलाएं।

– बी.‍सी.जी. का टीका
– हेपेटाईटिस B का प्रथम टीका
– डी.पी.टी.का प्रथम टीका
पोलियो की प्रथम खुराक
– हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा बी (HIB) की प्रथम ख़ुराक़
– रोटावायरस की प्रथम खुराक (मुँह में लिया जाने वाला डायरिया वैक्सीन)
– न्यूमोकोकल कन्जुगेटेड वैक्सीन पहली ख़ुराक़

2 1/2 माह में शिशु वैक्सीनेशन

शिशुओं को 2 1/2 माह की आयु में निम्न टीकों की द्वतीय ख़ुराक़ अवश्य दिलाएं।

– डी.पी.टी. का द्वितीय टीका
– हेपेटाईटिस B का द्वितीय टीका
– पोलियो की द्वितीय ख़ुराक़
– हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा बी (HIB) की द्वितीय खुराक
– रोटावायरस की द्वितीय खुराक (मुँह में लिया जाने वाला डायरिया वैक्सीन)
– न्यूमोकोकल कन्जुगेटेड वैक्सीन द्वितीय ख़ुराक़

3 1/2 माह में शिशु टीकाकरण

शिशुओं को 3 1/2 माह की आयु में निम्न टीकों की तृतीय ख़ुराक़ देना बिलकुल भी न भूलें।

– डी.पी.टी. का तृतीय टीका
– हेपेटाईटिस B का तृतीय टीका
– पोलियो की तृतीय खुराक
– हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा बी (HIB) की तृतीय ख़ुराक़
– रोटावायरस की तृतीय खुराक (मुँह में लिया जाने वाला डायरिया वैक्सीन)
– न्यूमोकोकल कन्जुगेटेड वैक्सीन तृतीय ख़ुराक़

12वें माह में शिशु वैक्सीनेशन

बच्चे को 10 से12 महीने की उम्र में ये टीके अवश्य लगवाएं

टाइफ़ाइड कन्जुगेटेड वैक्सीन (TCV 1) पहली ख़ुराक़
– हेपेटाइटिस A पहली ख़ुराक़
– थोड़े समय बाद हेपेटाइटिस A की दूसरी खुराक (लेकिन बच्चें के एक साल के होने से पहले, दोनों ख़ुराक़ दे देनी चाहिए)

Girl vaccination
Girl vaccination

1 वर्ष की आयु में वैक्सीनेशन

1 वर्ष की उम्र में ये टीके अवश्य लगवाएं

कॉलरा

– जैपनीज़ इन्सेफेलाइटिस की पहली ख़ुराक़
– जैपनीज़ इन्सेफेलाइटिस की दूसरी ख़ुराक़
– जैपनीज़ इन्सेफेलाइटिस की तीसरी ख़ुराक़
– वेरिसेला की पहली खुराक

15-18वें महीने में टीकाकरण

15-18 महीने की उम्र में ये टीके अवश्य दिलवाएं

– एम एम आर (मम्प्स, खसरा, रूबेला) पहली ख़ुराक़
– वेरिसेला की दूसरी खुराक
– D.P.T. का पहला बूस्टर डोज़
– हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा बी (HIB) का बूस्टर डोज़
– न्यूमोकोकल कन्जुगेटेड वैक्सीन का बूस्टर डोज़
– मुँह में लिया जाने वाला पोलियो वैक्सीन का चौथा ख़ुराक़
– टाइफाइड कन्जुगेटेड वैक्सीन (TCV 2) की दूसरी ख़ुराक़

5वें वर्ष में टीकाकरण

5 वर्ष की उम्र में ये टीके अवश्य दिलवाएं

– एम एम आर (मम्प्स, खसरा, रूबेला) की दूसरी ख़ुराक़
– D.P.T. का दूसरा बूस्टर डोज़
– मुँह में लिया जाने वाला पोलियो वैक्सीन की पाँचवी ख़ुराक़

Child vaccination
Child vaccination

10वें वर्ष में वैक्सीनेशन

10 वर्ष की उम्र में ये टीके ज़रूर लगवाएं

– टीडी (टेटनस, डिप्थीरिया)

इस तालिका का मुख्य उद्देश्य इन बीमारियों को पूरी तरह से ख़तम कर बच्चों को रोगमुक्त बनाना हैं।

ध्यान रहें

1. बच्‍चों को सभी टीके व ख़ुराक़ सही समय पर अवश्य दिलवाएं।

2. यदि किसी कारणवश आप अपने बच्चे को टीका लगवाना भूल गई है तो याद आते ही स्‍वास्‍थ्‍य कार्यकर्ता से सम्‍पर्क कर उस टीके को अवश्य लगवायें।

3. बच्चों को मामूली खांसी, सर्दी-जुकाम और बुखार होने पर भी टीके लगवाना सुरक्षित है।

4. कभी कभी डीपीटी का इंजेक्शन देने के बाद, शिशु में इंजेक्शन वाली जगह पर सूजन और लाली जैसे लक्षण नज़र आ सकते हैं या इंजेक्शन वाली जगह पर दर्दरहित गांठ बन सकती है, जो कुछ हफ़्तों के बाद ख़ुद ब ख़ुद ठीक हो जाती है।

5. यदि शिशु को टीका लगवाने के बाद कुछ लक्षण जैसे हल्का बुखार, दर्द, सूजन इत्यादि नज़र आए तो बिना घबराए तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

loading...