आज के समय में हर घर में बच्चा या तो टीवी देखने में या फिर कम्प्यूटर या मोबाइल पर गेम खेलते नज़र आते हैं या फिर कार्टून या सस्पेंस वाले कार्यक्रम बच्चों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। कुछ बच्चे तो अपना होमवर्क भी टीवी देखते देखते कर लेते हैं। इन सबके करण बच्चे जैसे खेलना कूदना तो भूल ही गये हैं। खेलने कूदने से शरीर चुस्त होता है। शरीर स्वस्थ रहता है। स्मरण शक्ति भी बढ़ती है। यानि इस तरह बच्चों को क्रिएटिव और एक्टिव रखा जा सकता है।

बच्चे खेल खेल के माध्यम से जितना अधिक सीख पाते हैं, उतना किसी अन्य के माध्यम से नहीं सीख पाते हैं। इसलिए ज़रूरी है कि बच्चों को खेल के माध्यम से सिखाने का प्रयास करें व उनको अन्य सकारात्मक चीज़ों से जोड़ें ताकि बच्चे क्रिएटिव व एक्टिव रहें।

बच्चों को क्रिएटिव बनायें

बच्चों को क्रिएटिव बनाने के उपाय

1. साथ में खेलें

बच्चों के साथ खेलने का अपना ही आनंद है। आप अपने बच्चों के साथ खेलने में हिचक महसूस न करें। फ़ुटबॉल, क्रिकेट और बैडमिंटन जैसे आउटडोर गेम खेलकर आप अपने बच्चों के अच्छे दोस्त भी बन सकते हैं जिससे आपके और बच्चों के बीच जेनेरेशन गैप कम होता है और आपसी समझ बढ़ती है।

2. हॉबी क्लास भेजें

वर्तमान समय में बच्चों को क्रिएटिव बनाने में हॉबी क्लासेज महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हॉबी क्लासेज में बच्चों को पेंटिंग, कुकरी, डांस, म्यूज़िक, क्राफ़्ट आदि में पार्ट टाइम प्रशिक्षण दिया जाता है। इन क्लासेज़ के द्वारा बच्चों में छुपी प्रतिभाओं को निखारने का प्रयास किया जाता है। इससे बच्चे क्रिएटिव बनते हैं और इनमे सकारात्मक सोच का विकास होता है।

3. डायरी लिखना सिखायें

बच्चों को अधिक टीवी देखने या अन्य बुरी चीज़ों से दूर रखने और उन्हें व्यस्त रखने के लिए ज़रूरी है कि उनमें कुछ अच्छी आदतों का विकास किया जाये। उन्हें सुबह से शाम तक की अपनी गतिविधियों को एक डायरी में लिखने के लिए कहें। सप्ताह की दिनचर्या को लिखने के बाद उन्हें ख़ुद अवलोकन करने को कहें कि कौन-सा दिन उन्हें सबसे अच्छा लगा और क्यों? इससे आप अपने बच्चों के विचारो को जान सकते हैं कि वह सकारात्मक सोचता है या नकारात्मक। फिर उसी के अनुरूप आप अपने बच्चे का मार्गदर्शन कर सकते हैं।

4. पुस्तकों से दोस्ती करायें

बच्चे तो गीली मिट्टी की तरह होते हैं और उन्हें सही दिशा दिखाना माता पिता का काम होता हैं। आप उन्हें ज्ञानवर्धक, रोचक और प्रेरक पुस्तकें पढ़ने को दे सकते हैं। उन्हें लाइब्रेरी का सदस्य बनाएं। पुस्तकें जीवन जीने की दिशा देती हैं। बच्चों में सकारात्मक सोच का विकास भी करती हैं।

इस तरह से माता पिता अपने बच्चों को एक सही दिशा दिखा सकते हैं। उनमे सृजनात्मक तत्वों का विकास कर सकते हैं। इन क्रियाओं के माध्य्म से बच्चों को क्रिएटिव और एक्टिव बनाया जा सकता है।

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