आज हम धनुरासन के चरण और लाभ के बारे में जानेंगे। जैसा कि हम जानते ही हैं कि आसनों के अभ्यास से मन की चंचलता धीरे धीरे दूर होकर मन में स्थिरता और शांति आती है। आसनों के निरंतर अभ्यास से अनेक प्रकार के मानसिक विकारों का शमन होता है। आसनों का प्रत्यक्ष प्रभाव स्नायुमंडल पर पड़ता है जिससे तनाव और उत्तेजना से बचाव होता है और मानसिक संतुलन बना रहता है।

योगासनों से मस्तिष्क संबंधी विकृतियां भी दूर होती हैं। इससे मस्तिष्क का संतुलन बना रहता है। योग के ऐसे कई महत्वपूर्ण अंग है जो व्यापक रूप में व्यक्तिगत अनुशासन पर बल देते हैं। इनका एक एक अंग महत्वपूर्ण है। यदि इनका भली भाँति पालन किया जाए तो मानसिक रोगों से भी बचा जा सकता है।

धनुरासन के चरण

अपरिग्रह और संतोष दो चीज़ों पर सबसे ज़्यादा ध्यान देने की आवश्यकता हैं क्योंकि मानसिक रोग की अभिवृद्धि में ये सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आसनों के नियमित उपयोग से हम मानसिक रोगों से मुक्ति पा सकते हैं।

योगासनों में सूर्य नमस्कार , उत्तानपादासन , वज्रासन , कुक्कुटासन , धनुरासन , मयूरासन , प्राणायाम , शवासन आदि ऐसे साधन हैं जिनको नियमित रूप से करने से मनुष्य मनोविकारों से दूर हो सकता है।

धनुरासन करने की विधि

  1. सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं।
  2. फिर घुटनों तक अपनी टांगों को मोड़ दीजिए।
  3. दोनों हाथों से अपने टखनों को पकड़ लीजिए।
  4. पांचों अंगुलियों को एक ओर रखिए।
  5. पहले पांव को बाहर की ओर खोलते हुए अपने घुटनों को ऊपर की ओर उठाइए।
  6. अब आगे से सांस भरते हुए छाती को भी उठाइए।
  7. गर्दन ऊपर उठाते हुए ऊपर की ओर देखिए।
  8. पूरी तरह धनुष की स्थिति में आ जाएं। पूरी शक्ति लगाते हुए आगे और पीछे का भाग उठाएं ताकि केवल पेट भूमि को छुए।
  9. अब धीरे धीरे सांस छोड़ते हुए वापस आ जाएं और अब शिथिलाशन करें ।

धनुरासन के लाभ

  1. इस आसन से रीढ़ की हड्डी पर पूरा दबाव पड़ता है, इससे लचक आती है।
  2. पेट के विकार और मोटापा भी दूर होता है।
  3. इससे गले , फेफड़े व पसलियों का विशेष व्यायाम होता है।

आपको धनुरासन से लाभ अवश्य मिलेगा, इसीलिए आप प्रतिदिन योगाभ्यास प्रारम्भ कीजिए।

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