भीषण गर्मी के दिनों में लू या हीट स्ट्रोक की चपेट कोई भी आ सकता है। बच्चे, बड़े, गर्भवती, श्रमिक, यात्री और खिलाड़ी सभी लू लगने से बीमार पड़ सकते हैं। समय पर बचाव और उपचार करके इसके कुप्रभाव से बचा जा सकता है। जब कोई व्यक्ति लू की चपेट में आता है तब उसके शरीर में नमक और पानी की कमी हो जाती है। जब व्यक्ति कड़ी धूप में बाहर निकलते हैं तो मस्तिष्क शरीर का तापमान सामान्य रखने में असफल हो जाता है। साथ ही लाल रक्त कणिकाएँ रक्त वाहिनियों में टूट जाने से कोशिकाओं का पोटेशियम लवण रक्त में बहने लगता है। जिससे धीरे धीरे शरीर के अंग शिथिल हो जाते हैं और सही इलाज के अभाव में मौत भी हो सकती है।

Heat stroke symptoms treatment, लू लगने के कारण और उपचार

लू लगने के लक्षण

  1. सिर दर्द और सिर में भारीपन का आभास
  2. थकावट अधिक महसूस होना, बेहोशी और अधिक प्यास लगना
  3. जी मिचलाना, चक्कर आना और शरीर का तापमान बढ़ना
  4. शरीर का तापमान अधिक होने से पसीना आना बंद होना, मुँह का रंग लाल हो जाना और त्वचा का सूख जाना

लू लगने से बचने के उपाय

  1. लू का असर अक्सर कुपोषित बच्चों, गर्भवती स्त्रियों और श्रमिकों पर अधिक होता है। इसलिए सुबह 10 से शाम 6 तक इन लोगों को धूप से बचकर ठंडी जगहों पर रहना चाहिए।
  2. कड़ी धूप में निकलने से पहले ठीक से खाना खायें और पर्याप्त मात्रा में पानी भी पिएँ।
  3. दो दो घंटे पर ठंडा पानी, छाछ, लस्सी, शर्बत, जलजीरा, आम का पना, जूस आदि पेय पदार्थों का सेवन करें।
  4. कड़ी धूप में हल्के सूती कपड़े पहनें और छाता लगाकर ही बाहर जाएँ। साथ में ठंडे पानी की समुचित व्यवस्था रखें।

लू लगने पर उपचार

  1. लू लगने और शरीर का तापमान बढ़ने पर व्यक्ति को ठंडे छायादार स्थान पर लिटाएँ।
  2. रोगी की त्वचा को गीले कपड़े से पोंछकर हल्के रंग के सूती वस्त्र पहनाएँ।
  3. रोगी यदि बेहोश हो जाए तो होश में आते ही उसको ठंडा पेय पदार्थ पीने को दें।
  4. जल्द से जल्द रोगी को उपचार के लिए चिकित्सक के पास ले जाएँ।

इस तरह आप स्वयं को लू लगने से बचा सकते हैं और अगर लू की चपेट में आ जाएँ तो अपनी जान बचा सकते हैं।

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