हिंदू शादीशुदा औरतें सिंदूर क्यों लगाती हैं

मेरे मन में हमेशा ये सवाल उठते थे कि भला शादीशुदा औरतें चूड़ी क्यों पहनती हैं? बिछिया क्यों पहनती हैं? मांग में सिंदूर क्यों भरती हैं? सुबह सुबह माँ तुलसी के पेड़ को जल क्यों चढ़ाती हैं? माथे पर कुमकुम / तिलक क्यों लगाती हैं? पूछने पर इनका वैज्ञानिक कारण किसी से भी नहीं पता चल पाया। बस ऐसा करना चाहिए क्यों करना चाहिए इसका जवाब किसी के पास नहीं अगर मैं आपसे पूछूँ तो आपका जवाब होगा कि नहीं पता। जबकि अगर आप विवाहित हैं तो चूड़ी भी पहनती हैं, बिछिया भी पहनती हैं, सिंदूर भी लगाती हैं और कुमकुम भी, ये सब करने का अगर वैज्ञानिक कारण किसी से पूछे तो शायद ही किसी को ही पता हो।

हिंदू शादीशुदा औरतें सिंदूर क्यों लगाती हैं

तो आज इन्ही सवालों का जवाब मैं आपको देने जा रही हूँ कि इन सब मान्यताओं के पीछे वैज्ञानिक कारण क्या हैं-

1. शादीशुदा औरतें सिंदूर क्यों लगती हैं?

सामाजिक मान्यता: सभी शादीशुदा महिलाएँ मांग में सिंदूर भरती हैं क्योंकि ऐसा माना जाता है कि वो अपनी मांग में जितना लंबा सिंदूर भरती हैं, पति की उम्र उतनी ही लंबी होती है।

वैज्ञानिक तर्क: सिंदूर में हल्दी, चूना और मरकरी होती है। इसका मिश्रण शरीर के रक्तचाप को नियंत्रित करता है। चूँकि इससे यौन उत्तेजनाएँ बढ़ती हैं इसलिए विधवा औरतों को सिंदूर लगाना मना होता है। साथ ही इससे स्ट्रेस भी कम होता है।

2. विवाहित स्त्रियाँ चूड़ियाँ क्यों पहनती हैं?

सामाजिक मान्यता: इसे सुहाग की निशानी मानते हैं इसलिए हिंदू शादीशुदा औरतें दोनों हाथों में चूड़ियाँ धारण करती हैं।

वैज्ञानिक तर्क: हाथों में चूड़ी पहनने से त्वचा और चूड़ी के बीच जब घर्षण होता है, तो उससे ऊर्जा उत्पन्न होती है, वह शरीर के रक्त संचार को नियंत्रित करती है। साथ ही हाथ में ढेर सारी चूड़ी होने के कारण ऊर्जा हाथ से बाहर नहीं जा पाती और वो ऊर्जा शरीर को मिल जाती है।

3. सुहागिन महिलाएँ बिछिया क्यों पहनती हैं?

सामाजिक मान्यता: शादी के बाद प्रत्येक महिला को बिछिया पहननी चाहिए। इसे पहनना शुभ माना जाता है।

वैज्ञानिक तर्क: शादीशुदा औरतें पैर की दूसरी ऊंगली में बिछिया पहनती हैं, क्योंकि उस नस का कनेक्शन बच्चेदानी से होता है। बिछिया पहनने से बच्चेदानी तक पहुँचने वाला रक्त का प्रवाह सही बना रहता है। इससे बच्चेदानी स्वस्थ रहती है। चांदी पृथ्वी से ऊर्जा ग्रहण करती है और उस ऊर्जा का संचार महिला के शरीर में करती हैं।

4. शादी ब्याह और तीज त्यौहार में मेंहदी क्यों लगाते हैं?

सामाजिक मान्यता: शादी ब्याह और तीज त्यौहार में मेंहदी लगाना शुभ माना जाता हैं और महिलाएँ सुन्दर भी दिखती हैं ।

वैज्ञानिक तर्क: मेंहदी एक जड़ी बूटी है। जिसे लगाने से शरीर का तनाव और सिर दर्द दूर हो जाता है। शरीर ठंडा रहता है। ख़ासकर वह नस ठंडी रहती है जिसका कनेक्शन सीधे दिमाग़ से होता है। इसलिए आपके पास चाहे जितना काम हो, तनाव महसूस ही नहीं होता है।

5. माथे पर कुमकुम / तिलक लगाना

सामाजिक मान्यता: माथे पर कुमकुम या तिलक लगाना शुभ होता है।

वैज्ञानिक तर्क: आँखों के बीच माथे तक एक नस जाती है। कुमकुम या तिलक लगाने से उस जगह की ऊर्जा बनी रहती है। माथे पर तिलक लगाते समय जब अंगूठे और उंगली से प्रेशर पड़ता है, तब चेहरे की त्वचा को रक्त सप्लाई करने वाली मांसपेशी सक्रिय हो जाती है। इससे चेहरे की कोशिकाओं तक रक्त अच्छी तरह से पहुँचता है।

6. कान छिदवाना

सामाजिक मान्यता: परिवार के द्वारा बालिका के छोटी उम्र में कान छिदवा दिये जाते हैं जिससे वे कानों में आभूषण धारण कर सकें क्योंकि आभूषण धारण करने से वे सुंदर दिखेंगी।

वैज्ञानिक तर्क: दर्शन शास्त्री मानते हैं कि इससे सोचने की शक्ति बढ़ती है, जबकि डॉक्टर का मानना है कि इससे बोली अच्छी होती है। कानों से होकर दिमाग़ तक जाने वाली नस का रक्त संचार नियंत्रित रहता है।

7. तुलसी के पेड़ की पूजा

सामाजिक मान्यता: तुलसी को भगवान (माँ) मानते हैं इसलिए उनकी पूजा करनी चाहिए। कुछ लोग यह भी मानते हैं कि तुलसी का पौधा घर में लगाने से व प्रतिदिन जल चढ़ाने से घर की सुख शांति बनी रहती है।

वैज्ञानिक तर्क: तुलसी इम्यून सिस्टम को मजबूत करती है, अगर घर में पेड़ होगा तो लोग तुलसी की पत्तियों का इस्तेमाल करेंगे और जिससे वे बीमारी से दूर रहेंगे। साथ ही शाम को तुलसी के पेड़ के पास दीपक जलाने से ऑक्सीजन मिलती है।

इन मान्यताओं के पीछे छिपे वैज्ञानिक कारणों को जानकर आप ज़रूर इससे लाभान्वित होंगी और इस ज्ञान से दूसरों को लाभान्वित करेंगी ताकि जब आपसे कोई ये प्रश्न पूछे तो आप उनके सवालों का सही और वैज्ञानिक पूर्ण ढंग से जवाब दे सकें। यही तो जीने की कला और अंदाज़ है।

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