आज नवरात्र प्रारम्भ हो चुकी है, भक्तजनों के मन में उत्साह और श्रद्धाभाव भरा हुआ। सभी माँ को प्रसन्न कर मनचाहे फल की प्राप्ति करने का यत्न कर रहे हैं। मान्यता है कि नवरात्र में माँ को आसानी से पूजा, आरती और व्रत के माध्यम से प्रसन्न कर मनोकामनापूर्ति की जा सकती है। पूरे भारत वर्ष में नवरात्र का अपना विशेष महत्व है। नवरात्र से मन और शरीर का शुद्धिकरण होता है और असीम शक्ति की प्राप्ति होती है। भगवान राम ने भी लंकापति रावण को युद्ध में हराने के लिए नवरात्र का व्रत किया था और अपनी विजय सुनिश्चित की थी। तो आइए महिषासुर मर्दनी माँ दुर्गा के नौ रूपों को उपासना कर अपने जीवन को सुखमय बनायें।
नवरात्र में माँ के 9 रूपों की पूजा

Worship of Durga Ma in Navratri Days – A Hindi Article

नवरात्र में 9 दिनों तक माँ की पूजा किस विधि विधान से करें ये जानना बहुत आवश्यक है –

* प्रथम दिन केसरिया वस्त्र पहनें

नव दुर्गा का पहला रूप शैलपुत्री है। इसी दिन से योगसाधना का प्रारम्भ होता है। इस दिन केसरिया वस्त्र पहनें। माता को फल अर्पित करें।

* दूसरे दिन दूध आधारित भोज्य पदार्थ अर्पित करें

दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। इस दिन साधक को लाल वस्त्र धारण करके देवी माँ की आराधना करनी चाहिए। माँ को दूध की भोज्य पदार्थ अर्पित करें। साथ ही प्रसाद वितरण भी करें।

* तीसरे दिन लाल फूलों से करे उपासना

चंद्रघंटा को देवी का क्लयाणकारी रूप माना गया है। इस दिन भक्त पीले रंग के कपड़े पहनकर माँ की पूजा करें। लाल पुष्पों से माँ की आराधना करें। इस दिन कुट्टू के आटे का आहार लेना शास्त्रसम्मत माना गया है।

* चौथे दिन शाकाहार करें

चौथे दिन माता कूष्मांडा की उपासना करनी चाहिए। इस दिन बच्चों की लगी कुदृष्टि उतारने की परम्परा है। इस दिन भक्त हरे रंग के वस्त्र धारण करें। हरी सब्ज़ियों का सेवन करें। इस दिन पोधे के सेवा करना माँ की आराधना का ही एक रूप है।

* पाँचवे दिन स्कंदमाता की पूजा मखाने की खीर से करें

पाँचवे दिन स्कंदमाता की पूजा करते हैं। स्कंदमाता कुमार कार्तिकेय की माता है। इनका पूजन करने से भक्तों को कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। इस दिन भक्त रंग बिरंगे वस्त्र पहनें। माँ को चुनरी चढ़ाना भी लाभकारी होता है। देवी माँ की कथा सुनें और जागरण करें। फलाहार के साथ मखाने की खीर खायें।

* माँ कात्यानी के लिए मेवा मिश्री का भोग लगायें

छठे दिन माँ कात्यानी की पूजा होती है। कात्यानी माँ की आराधना के लिए केसरिया वस्त्र धरण करें। माँ कात्यानी को मेवा मिश्री का भोग लगाना सर्वोत्तम है।

* माँ कालरात्रि के लिए करें रात्रि जागरण

सातवा दिन माँ कालरात्रि देवी की पूजा की जाती है, इनकी पूजा में रात्रि जागरण का महत्व अधिक है। चुनरी पहनकर रंग बिरंगे पुष्पों से माँ की पूजा करने का विधान है। इस दिन फलाहार ग्रहण करें।

* कन्या पूजन करें

आठवें दिन महागौरी की पूजा का विधान है। इनकी पूजा के लिए इस दिन कन्या पूजन करना और हलवा पूरी और चने का भोग लगाना श्रेयस्कर माना जाता है और कन्या पूजन के बाद कन्याओं को उपहार भी देने का विधान है।

* सपरिवार आरती करें

नवे दिन सिद्धिदात्री माँ की पूजा का विधान है। इस दिन सपरिवार मिलकर माँ की आरती करनी चाहिए ताकि भक्त की सारी मनोकामना पूर्ण हो। इस दिन पूरी हलवा, चना साग बनाने का विधान है।

भक्तजन अष्टमी या नवमी को हवन करके अपने व्रत का समापन करते हैं। इस तरह पूरे नौ दिन नियम के अनुसार पूजा कर माँ को प्रसन्न किया जा सकता है।

आपकी पूजा सफल हो इस मनोकामना के साथ जय माता दी।