जीवन जीने के लिए जितना हम सबका भोजन करना ज़रूरी है, उतना ही स्वास्थ्य की देखभाल करना भी ज़रूरी है। चूँकि आज के समय में लोग इतना ज़्यादा व्यस्त हैं कि उन्हें अपने स्वास्थ्य की भी चिंता नहीं रहती है। ख़ास तौर से महिलाएं जो परिवार और कामकाज के बीच ख़ुद के लिए वक़्त नहीं निकाल पाती हैं, चाहें उन्हें कितनी ही परेशानी क्यों न हो? जिस कारण उनमें हार्मोंस असंतुलन के कारण पीसीओएस की समस्या देखी जा रही है।

महिलाओं को युवावस्था में स्वास्थ्य संबंधी कई समस्या होती है, उनमें से एक पीसीओएस यानि पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम की समस्या भी है। जिसके लक्षण के बारे में महिलाओं को जानकारी होनी चाहिए तथा लक्षण के ज्ञात होने पर सही समय पर इसका उपचार होना अति आवसश्यक है।

पीसीओएस

पीसीओएस के कारण, लक्षण और उपचार

पीसीओएस क्या है

एक शोध के मुताबिक युवावस्था में महिलाओं में ये समस्या तेजी से बढ़ रही हैं।इस उम्र में हार्मोन्स का अत्यधिक सक्रिय होना और इनका असंतुलित होना इसकी मुख्य वजह हैं।इस उम्र में महिलाओं के अंतः स्त्रावी ग्रंथियों से कई तरह के हार्मोन्स का स्त्राव होता हैं जिनमें मुख्यतः एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रॉन नामक सेक्स हार्मोन सक्रिय होते हैं।इसके अलावा आंशिक रूप से मेल हार्मोन टेस्टोस्टेरॉन का भी सिक्रिशन होता हैं।लेकिन कभी कभी ये अधिक मात्रा में होने लगता हैं जिससे महिलाओं के ओवरी में एग्स बनने और बाहर निकलने की प्रक्रिया में रुकावट पैदा होती हैं।जिससे ये एग्स गांठ जैसा रूप धारण कर लेते हैं।इनके भीतर तरल पदार्थ भरा होता हैं।इसी स्टेज को पीसीओएस यानि पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम कहा जाता हैं।

पीसीओएस ओवरी

पीसीओएस के लक्षण

  1. पीरियड्स में होने वाली अनियमितता तथा ज़्यादा ब्लीडिंग का होना इसका मुख्य लक्षण है।
  2. अत्यधिक तनाव युक्त रहना, छोटी छोटी बातों को लेकर चिड़चिड़ापन होना तथा आवश्यकता से अधिक थकान का महसूस होना भी इसके मुख्य लक्षणों में शामिल हैं।
  3. अचानक वज़न का बढ़ने लगे तो इसके प्रति सचेत हो जाना चाहिए।
  4. चेहरे, पेट और पीठ पर अनचाहे बालों का आना भी इसकी सम्भावना को बढ़ा देता है।
  5. भोजन में मीठे और वसा युक्त पदार्थो की अधिकता, खानपान में अनियमितता भी इसके कारण बन जाते हैं।
  6. इसके अलावा अनियमित दिनचर्या और शारीरिक गतिविधियाँ न करने पर भी इसकी सम्भावना बढ़ जाती है।

पीसीओएस के लक्षण

पीसीओएस से बचाव

  1. पीसीओएस इस समस्या से बचने के लिए महिलाओं को अपनी नियमित दिनचर्या में आवश्यक बदलाव करना होगा। जैसे नियमित सुबह सुबह टहलने जाएं और व्यायाम करें, घर के कामों को स्वयं करें और अधिक से अधिक पैदल चलने की कोशिश करें। इससे इनका वज़न भी संतुलित रहेगा और इस समस्या से निजात भी मिलेगी।
  2. इस अवस्था में खानपान का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि उचित आहार आपको रोगों से लड़ने की शक्ति देता है और आपको स्वस्थ भी रखता है।
  3. जिन महिलाओं के शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर अधिक है, उन्हें तले भूने पदार्थों और मीठे पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए। साथ ही चिकनाई रहित दूध और दही का सेवन सेहत के लिए बेहद उत्तम रहता है।
  4. प्रतिदिन 8 घंटे की भरपूर नींद ले और स्वयं को ख़ुश रखने का प्रयास करें।
  5. नियमित रूप से व्यायाम करने की आदत डालिए और ट्रेनर की सहायता से कॉर्डियो वस्कुलर एक्सरसाइज़ भी कीजिए।
  6. असामान्य बदलाव को क़तई नज़र अंदाज़ न करें और डाक्टरी सलाह लें।

पीसीओएस की जाँच

पीसीओएस की जाँच करने के लिए पेल्विक अल्ट्रासाउंड और हार्मोन परीक्षण किया जाता है। समस्या का पता समय से पहले चल जाए तो दवाइयों से ही इलाज हो सकता है। अगर नहीं तो लेप्रोस्कोपिक सर्जरी का उपाय रहता है। सर्जरी के 1 माह तक सम्बंध और प्रेग्नेंसी कंसीव न करने की सलाह दी जाती है। आवश्यक है कि डॉक्टरी परामर्श के अनुसार ही दिनचर्या बना लें।

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