मेरी भाभी जॉब के कारण दिल्ली में रहती है उनका एक छोटा बेबी भी है। ये उनका पहला बेबी है। इसलिए बेबी की छोटी से छोटी चीज़ के लिए वे बहुत ध्यान रखती हैं। शिशु का आहार, उसकी देख रेख और उसका ध्यान रखना सच में एक अलग अनुभव होता है। लेकिन कभी कभी वे डरती भी है कि उस नन्हींं सी जान की देख रेख में कहीं कोई कमी न रह जाए।

अब उनका बेबी 6 महीने का हो गया और अब उसे दूध के अलावा खाने के लिए फ़ूड भी देना शुरू करना है। लेकिन बेबी को फ़ूड देने के लिए वे क्या करें, उसे क्या खिलाएं इन बातों को लेकर वे थोड़ा परेशान हैं क्योंकि वे दिल्ली में अकेली रहती हैं इसलिए वे असमंजस में हैं कि शिशु का आहार कब शुरू करें, कैसे खिलाएं और कब क्या दें।

शिशु का आहार

अगर आप भी पहली बार माँ बनी है और आपके मन में भी यही सवाल है तो परेशान न होंं क्योंकि आज हम आपको यही बताने जा रहे हैं कि शिशु का आहार कैसा हो और किन किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है…

शिशु का आहार कब शुरू करें

डॉक्टरों की मानें तो बच्चे को 4 से 6 महीने के बीच में आप थोड़ा थोड़ा खाने को दे सकती हैं। अपने बच्चे के व्यवहार और उसमें होने वाले परिवर्तन पर गौर करें कि क्या वो दूध पीने के बाद भी भूखा रह जाता है। जब आप खाना खा रहीं हो तो क्या वह आपकी प्लेट की तरफ़ लपकता है। अगर आप उसके मुंह में कुछ फ़ूड डालती हैं तो क्या वो उसे बाहर नहीं निकालता बल्कि उसे देर तक मुंह में रखे रहता है, तो समझ लीजिए कि आपके बेबी को खाने की ज़रूरत अब बढ़ने लगी है।

इस उम्र में बच्चे का सिर भी टिकना शुरू हो जाता है, जिसके बाद उसे कुछ खाने के लिए देना चाहिए क्योंकि खाना निगलने के समय बच्चे का सिर सीधा होना चाहिए, वरना खाना गले में फंस सकता है।

नवजात शिशु के रोने के कारण

शिशु को आहार कैसे खिलाएँ

प्रारम्भ में बच्चे को ढेर सारा खाना खिलाना शुरू न करें। शिशु का आहार नर्म और सॉलिड होना चाहिए । इसके अलावा सूजी की खीर, दाल का पानी भी बेहतर विकल्प है। इसके अलावा स्टीम किया हुआ सेब, नाशपाती, गाजर, आलू और शकरकन्द व दूध में ग्लूकोज़ बिस्किट दें। अलग अलग चीज़ों के लिए बच्चा अलग अलग तरह का रेसपोंस देगा इसलिए दिन में 2 से 3 बार वह चीज़ दें, ताकि इन चीज़ों के लिए उसका स्वाद विकसित हो सकें।

शिशु की भूख

शिशु को कब क्या आहार खिलाएँ

8 से 9 महीने तक बच्चा धीरे धीरे सरकना शुरू कर देता है और उसका मेटाबलिज़्म भी बढ़ जाता है। उसकी भूख में धीरे धीरे इज़ाफ़ा भी होने लगता है। अब आप उसे हलवा, दलिया उपमा, सूप, बेसन का चीला, पोहा और खिचड़ी भी दे सकती हैं। बच्चे के खाने में मिर्च न डालें और नमक का भी कम उपयोग करें। सब्ज़ियों में मौजूद पोषक तत्व बच्चे के विकास और ग्रोथ के लिए बेहद ज़रूरी हैं। कद्दू और गाजर जैसी सब्ज़ियाँ पचाने में आसान रहेंगी।

शिशु का ध्यान आकर्षित करें

शिशु का आहार देना अपने आप में एक सुखद अनुभव है। कलरफ़ुल बरतन बच्चे का ध्यान अपने ओर आकर्षित करते हैं इसलिए आप इनका भी उपयोग करें। खाना खिलाते समय बीच बीच में उससे बातचीत भी करते रहें। बच्चे के खिलौने को भी दिखाकर उसका ध्यान आकर्षित कर सकती हैं। यह सब एक माँ के लिए बहुत ख़ास अनुभव से भरा रहता है।

तो इन ख़ास बातों को हमेशा ध्यान रखें और इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करें ताकि और भी लोग इस पोस्ट से लाभान्वित हो सके।

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