स्वाइन फ़्लू संक्रमण का वायरस इनफ़्लुएंज़ा ए एच1एन1 किसी साधारण फ़्लू की भांति ही फैलता है। जिन लोगों की रोगों से लड़ने की क्षमता कम होती है, उन लोगों इस संक्रमण का ख़तरा सबसे ज़्यादा रहता है। आप पिछले लेख से स्वाइन फ़्लू की जानकारी ले सकते हैं।

स्वाइन फ़्लू संक्रमण के कारण

१. यह वायरस संक्रमित व्यक्ति द्वारा दूसरों में फैलता है। जब रोगी खांसता और छींकता है तो उसकी नाक और मुँह से निकलने वाली द्रव्य के साथ विषाणु हवा में फैल जाते हैं। जिनमें कुछ किसी वस्तु पर रुक जाते हैं। यदि आप ऐसी हवा और किसी वस्तु के संपर्क में आए तो स्वाइन फ़्लू संक्रमण का ख़तरा बढ़ जाता है।

२. घर और बाहर इस्तेमाल आने वाली सभी वस्तुएं इस वायरस की चपेट में हो सकती हैं। इसलिए जब कोई व्यक्ति ऐसी वस्तुओं को छूता है, जिसे संक्रमित व्यक्ति ने छुआ और इस्तेमाल किया हो तो स्वाइन फ़्लू हो सकता है।

स्वाइन फ़्लू संक्रमण

स्वाइन फ़्लू की रोकथाम

इस जानलेवा संक्रमण से बचने के लिए कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहले तो शरीर को रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना ज़रूरी है। आइए इम्यूनिटी बढ़ाने के उपाय जानते हैं।

एंटी ऑक्सीडेंट – स्वास्थ्य वर्धक और पोषक तत्वों से भरपूर खाना खाइए, जिससे शरीर को सभी विटामिन और खनिज मिल सकें।

मुँह पर मास्क लगाएँ – घर से बाहर निकलते समय मुँह पर मास्क पहनना चाहिए। गंदे रास्तों से न जाएं और घर में साफ़ सफ़ाई रखें।

प्रोबायोटिक का सेवन – दूध जैसे दिखने वाले प्रोबायोटिक आपको किराने की दुकान पर मिल जाएंगे। इनमें ऐसे गुड बैक्टीरिया होते हैं जो स्वाइन फ़्लू संक्रमण से आपकी रक्षा करते हैं।

टेंशन न करेंमानसिक तनाव का सीधा संबंध रोग प्रतिरोध क्षमता से है। जहाँ आपने टेंशन ली आपकी इम्यूनिटी कम हो जाएगी।

योग और व्यायामनियमित योग और व्यायाम करने से शरीर में रक्त संचार बढ़ता है। शरीर हृष्ट पुष्ट रहता है। बीमारियां नहीं होती हैं। इम्यून पॉवर बढ़ जाती है।

अच्छी नींद लें – अच्छे स्वास्थ्य के लिए रोज़ 8 घंटे से ज़्यादा सोना चाहिए। सोते समय कोई शोर और डिस्टर्ब करने वाली चीज़ें न हों।

स्वाइन फ़्लू संक्रमण से बचाव

१. साफ़ सफ़ाई का पूरा ध्यान दीजिए। अपने रहने और काम करने की जगहें गंदी न रहने दें।

२. छींकते और खांसते समय मुँह पर रुमाल रखिए। इस्तेमाल के बाद रुमाल को खुले स्थान पर न छोड़ दीजिए।

३. हाथ धोने के लिए एंटी सेप्टिक साबुन का प्रयोग करें। हैन्ड सैनेटाइज़र भी प्रयोग कर सकते हैं। बिना हाथ धुले अपनी आंख, नाक और मुँह पर हाथ न लगाएं। न ही किसी दूसरे को छुएं।

४. यह संक्रमण सांस लेने से फैलता है, इसलिए मास्क पहनना न भूलें। नाक और मुँह को हमेशा ढक कर रखें।

५. स्वाइन फ़्लू के लक्षण दिखते ही घर पर आराम कीजिए। स्कूल, कॉलेज, ऑफ़िस, मंदिर, शॉपिंग माल और दूसरे पब्लिक जगहों पर न घूमें।

६. संक्रमण से बचने के लिए व्यस्क व्यक्ति महीने में 1 या 2 बार कपूर का छोटा सा टुकड़ा पानी निगलें। छोटे बच्चों को केले के साथ मिलाकर दें। इस उपाय के 1 बार से अधिक मत करें।

७. जिस शहर में स्वाइन फ़्लू संक्रमण फैल रहा हो वहां के लोग बचाव के लिए 5-5 ग्राम देशी कपूर और छोटी इलायची को पीसकर सूती कपड़े में बांधकर थोड़ी थोड़ी देर में सूँघें। ऐसा करने से आप बचे रहेंगे।

संक्रमण फैलने से पहले ही सारी तैयारियां शुरु कर दें। अब इससे बचाव के टीके भी मौजूद हैं। उन्हें समय से लगवा लें। ताकि संक्रमण के समय महंगे दामों पर न लगवाने पड़ें।

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