नवजात शिशु का आगमन जीवन में कई सारी ख़ुशियां और उमंग लेकर आता है। लेकिन उनका पालन पोषण करना, उनको समझना और उनकी उचित देखभाल करना यह सब एक नई माँ के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होता है। क्योंकि बच्चे के शुरुआती दिनों में यह समझना थोड़ा मुश्किल लगता है। कि उसे कब भूख लगी है, उसे कब कोई दर्द या तक़लीफ़ है। ऐसे में छोटे बच्चों को विशेष देखभाल की ज़रूरत होती है। इस उम्र में छोटे बच्चे को दूध पिलाने, उसे नहलाने, मालिश करने और उसकी नैपी बदलते समय काफ़ी सावधानी बरतनी पड़ती है ताकि आपका बच्चा हमेशा हंसता मुस्कुराता रहे। नन्हें शिशु की उचित देखभाल के लिए उन्हें समझना बहुत ज़रूरी है क्योंकि छोटे बच्चें सिर्फ़ रोकर अपनी ज़रूरतों के बारे में बताते हैं ऐसे में ज़रूरी है कि आप अपने शिशु की आदतों को जानें और उसे समझें।

नन्हें शिशु को समझना

नन्हें शिशु क्यों रोते हैं?

आमतौर पर आप सब ने छोटे बच्चों को बहुत रोते हुए देखा होगा। क्योंकि छोटे बच्चों को जब भी भूख लगती है या उनकी नैपी गीली होती है या जब वह कोई नया चेहरा देखते हैं या जब कोई नई आवाज़ सुनते हैं या जब उसे बड़ों द्वारा गोद में उठाए जाने की मुद्रा पसंद नहीं आती या फिर उसे कोई भी बात नापसंद होती है तो वह रोकर ही अपना विरोध प्रदर्शित करता है। कभी-कभी बच्चे थकान की वजह से या किसी भी प्रकार की दर्द या तक़लीफ़ के कारण भी अधिक रोते हैं। दरअसल छोटे बच्चे हम लोगों की तरफ़ बोलकर अपनी बात कह नहीं पाते हैं इसीलिए अपनी बात को कहने के लिए वो रोते हैं और अपने रोने से लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं। जिससे लोग उनके रूदन को सुनकर उनकी तक़लीफ़ को समझ सकें।

नन्हें शिशु को समझने के टिप्स

– अगर बच्चा शुरुआती दिनों से छह महीने तक बहुत जल्दी-जल्दी नैपी गीला करते हैं। तो हर एक घंटे पर बच्चे की नैपी को चेक करें और गीली लगने पर ज़रूर बदल दें। बच्चे की नैपी बदलने से पहले आप साफ़ नैपी, कॉटन और क्रीम ये कुछ ज़रूरी चीज़ें बच्चे के पास रख लें, उसके बाद ही बच्चे की नैपी बदलें। इसके अलावा अगर आपका बच्चा गहरी नींद से चौंक कर जागने के बाद रोने लगे तो सबसे पहले आप उसकी नैपी चेक करें कि कहीं वह गीलेपन की वजह से तो नहीं रो रहा है। अगर ऐसा है तो उसकी नैपी बदल दीजिए।

– इसके अलावा अगर नन्हा शिशु गहरी नींद में बहुत अधिक रोने लगे तो उसकी गर्दन को भी चेक करें। अगर उसकी गर्दन में पसीना आ रहा है तो बच्चे को अधिक गर्मी लग रही है शायद इसीलिए बच्चा गहरी नींद में होने के बावजूद रोने लगा है।

– आपने अक्सर देखा होगा कि अगर नन्हें शिशु की तेल मालिश करें तो वो तेल मालिश के बाद गहरी नींद में सो जाते हैं। क्योंकि इससे नींद अच्छी आती है। इसीलिए बच्चे की मालिश करने का सबसे सही तरीक़ा यह है कि आप तेल मालिश हमेशा एक ऐसे कमरे में करें जिससे बच्चा बाहरी हवा और ठंड से बच सकें। तेल मालिश करने से पहले आप अपने हाथों में बेबी ऑयल लगा कर बच्चे की मालिश शुरू करें। मालिश की शुरुआत हमेशा बच्चे के पैरों से करें। फिर हल्के हाथों से उसके पेट और छाती की मालिश करें। उसके बाद बच्चे को पेट के बल उलटा लिटाकर उसकी पीठ और कमर की मालिश करें और सबसे अंत में बच्चे के सिर की मालिश करें। मालिश से न केवल बच्चे के शरीर को आवश्यक पोषण मिलता है बल्कि उसके शरीर की क़सरत भी होती है।

– मालिश करने के बाद उसे नहलाना चाहिए। बच्चे को नहलाने से पहले कुछ ज़रूरी सामान जैसे गुनगुना पानी, बेबी सोप, शैंपू, तौलिया, बच्चे के कपड़े और बाथ टब को एक जगह एकत्र करके फिर बच्चे को नहलाना शुरू करना चाहिए।