किसी युवक को युवती के स्पर्श से सेक्स की अनुभूति का आनन्द हो, स्पर्श की अनुभूति से कामोत्तेजना हो या फ़िल्म में कामुक दृष्य देखकर उत्तेजना हो, जिससे रात में सोते समय स्वप्न में किसी लड़की के साथ सहवास करते हुए वीर्य स्खलित हो जाए, तो स्वप्न में वीर्य स्खलन की यह प्रवृति ही स्वप्नदोष कहलाती है। लगभग 30 दिन में एक या दो बार स्वप्नदोष की विकृति प्राकृतिक हो सकती है। लेकिन हर दूसरे या तीसरे रात सोते हुए वीर्य स्खलित होने लगे तो यह विकृति रोग का रूप धारण कर लेती है। स्वप्नदोष की अधिकता से शुक्राणु की क्षति के साथ शारीरिक कमज़ोरी बढ़नी लगती है, साथ ही मस्तिष्क पर भी हानिकारक प्रभाव पड़ता है।

स्वप्नदोष के विकार से बचने के लिए सबसे पहले युवकों को विचारों में परिवर्तन करना चाहिए। अच्छा सोचना चाहिए। धार्मिक पुस्तकें पढ़नी चाहिए। फ़ास्ट फ़ूड, डिब्बा बंद खाद्य पदार्थ तथा मिर्च मसालों वाले खाद्य पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा घरेलू उपाय अपनाकर कुछ ही दिनों में स्वप्नदोष से मुक्ति पाई जा सकती है।

स्वप्नदोष

स्वप्नदोष का आयुर्वेदिक उपचार

– 5 चम्मच अश्वगंधा के चूर्ण को देशी घी में भूनकर रोज़ाना 3 ग्राम इस मिश्रण को दूध के साथ सेवन करने से भी वीर्य में वृद्धि होती है, इससे शारीरिक दुर्बलता दूर होती है और स्वप्नदोष से मुक्ति मिलती है।

– गिलोय, गोखरू और आंवला इन तीनों को बराबर मात्रा में मिलाकर चूर्ण बना लीजिए। रोज़ाना 5 ग्राम मिश्रण जल के साथ सेवन करने से स्वप्नदोष से छुटकारा मिलता है।

– 5 ग्राम कौंच के बीजों की गिरी, 5 ग्राम शतावरी, 5 ग्राम सफेद मूसली, 5 ग्राम आँवला और 5 ग्राम मिश्री इन सभी सामग्री को आपस में मिलाकर कूट कर चूर्ण बना लीजिए। रोज़ाना 3 ग्राम इस मिश्रण को घी और मिश्री मिलाकर सेवन करने से स्वप्नदोष से निजात मिलती है।

– 10 ग्राम आंवला के चूर्ण में 10 ग्राम मिश्री का चूर्ण मिलाकर रख लीजिए। रोज़ाना 6 ग्राम इस मिश्रण को जल के साथ सेवन करें। इससे स्वप्नदोष की विकृति का निवारण होता है।

– 1 लीटर दूध में 20 ग्राम शतावरी उबालकर सेवन करने से स्वप्नदोष की विकृति नष्ट होती है और शारीरिक दुर्बलता भी दूर होती है।

– 10 ग्राम सेमन की छाल को दूध में पीसकर इसमे मिश्री मिलाकर रोज़ाना सेवन करने से वीर्यदोष, स्वप्नदोष की समस्या दूर होती हैं।

– मिश्री में त्रिफला का चूर्ण मिलाकर खाने से स्वप्नदोष रोग छुटकारा मिलता है।

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– हर रोज़ 2 पत्ते नीम के चबा चबा कर खाने से भी वीर्य दोष से छुटकारा मिलता है।

– रोज़ाना 2 बूंद बरगद के पत्तों का दूध बताशे में मिला कर सेवन करने से भी वीर्यदोष से मुक्ति मिलती है।

– नित्य रात को 1 गिलास दूध के साथ 15 ग्राम गुलकन्द का सेवन करने से स्वप्नदोष की विकृति नष्ट होती है और शारीरिक दुर्बलता भी दूर होती है।

– फलों का रस, सलाद और पके पपीते का सेवन करने से वीर्यदोष की विकृति नष्ट होती है और शरीर बलिष्ठ बनता है।

– 25 ग्राम अखरोट को पीसकर केसर मिले हुए दूध के साथ सेवन करने से शारीरिक कमज़ोरी दूर होती है और वीर्य में वृद्धि होती है।

– 6 ग्राम सफेद प्याज का रस, 3 ग्राम अदरक का रस और 5 ग्राम शहद इन तीनों को मिलाकर सेवन करने से शारीरिक कमज़ोरी दूर होती है।

– अश्वगंधा के चूर्ण को दूध और खजूर के साथ सेवन करने से भी वीर्य में वृद्धि होती है और शारीरिक दुर्बलता दूर होती है।