बच्चे एक कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं जिन्हें आप जैसा बनाने का प्रयास करेंगें वो वैसे ही बनते चले जाते हैं। इसीलिए माता-पिता बचपन से ही बच्चों में अच्छे संस्कारों के बीज डालने की कोशिश करें। उन्हें बड़ों का सम्मान करना जैसे चरण स्पर्श, नमस्ते आदि को करने की आदत डालें। जिससे उनकी झिझक खत्म होगी। धीरे धीरे संस्कार की नींव पड़ने बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ने लगेगा।

इसके अलावा जब बच्चे स्कूल जाने लगे तो स्कूल में पढ़ाई के अलावा एक्स्ट्रा गतिविधियों में भी भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें। इससे आपको बच्चों में आत्मविश्वास और हिम्मत बढ़ेगी। उनमें कुछ करने का जज़्बा भी आएगा। अपने बच्चों को कभी भी हार जीत के दलदल में ना डालें। क्योंकि आपके द्वारा जीत का दबाव कभी कभी बच्चों को डिप्रेशन में ले जा सकता हैं। इसीलिए बच्चों को हर चीज धीरे धीरे सीखने दें। लेकिन इस बात का भी ध्यान रखें कि बच्चे सकारात्मक सोच रखकर आगे बढ़ने का प्रयास करते रहें।

बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाना

इसके अलावा अपने बच्चे के दोस्त बनें। उनसे ऐसा व्यवहार रखे कि वे आपसे अपनी ख़ुशी, परेशानी और गलतियाँ सब कुछ बिना झिझके शेयर करें। इससे आपको अपने बच्चे को समझने में आसानी होगी। अगर बच्चा स्वयं में कम आत्मविश्वास महसूस कर रहा है तो आप उसकी बात समझकर मदद करें। बच्चा अहंकारी बन रहा है उसे समझा कर सही राह दिखायें।

बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के उपाय

1. सकारात्मक सोच

बच्चों में सकारात्मक सोच के साथ जीने की कला सिखाएँ। एक सकारात्मक सोच न केवल जीने का अंदाज़ बदल देती है। यह बच्चों को उन बुलंदियों तक लेकर जाती है जहां सफलता उनके कदमों को चूमती है।

2. आंख मिलाकर बात करें

बच्चे किसी से भी बात करते समय उनसे आंख मिलाकर बात करें। ऐसा करने से न केवल बच्चे के अंदर आत्मविश्वास बढ़ेगा। बल्कि बच्चे के मन में जो भी डर या झिझक है वो भी धीरे धीरे दूर हो जाएगा।

3. अपनों के बीच से शुरुआत करें

अगर आपके बच्चे में आत्मविश्वास की कमी हैं। वो कई लोगो के बीच अपनी बात को कहने से झिझकता है तो उसके बोलने की शुरुआत घर के सदस्यों या दोस्तों के बीच से करें। ताकि परिवार और दोस्त उसको बेझिझक बोलने के लिए प्रोत्साहित कर सकें। बच्चा धीरे धीरे अपने डर को ख़त्म करके सफलता प्राप्त कर सके।

4. जिम्मेदारी उठाने दें

बच्चे घर, परिवार या स्कूल किसी भी गतिविधि में भाग लें। पूरी जिम्मेदारी से उस गतिविधि को पूरा करने का प्रयास करें। क्योंकि किसी भी कार्य को पूरा करने से बच्चों में आत्मविश्वास पनपता हैं। उस कार्य का परिणाम आपको कुछ न कुछ सीखने के लिए प्रोत्साहित करता है।

बच्चों जिम्मेदारी उठाने दें

5. नकारात्मक सोच से दूर रहें

बच्चों को समझाएं, किसी भी काम को करने से पहले उस कार्य के प्रति नकारात्मक सोच न रखें। ऐसा करने से आपका आत्मविश्वास और उत्साह दोनों कम होगा। कार्य को करने का हौसला रखना अच्छी बात है। अगर आप पहले से ही उसकी असफलता को सोच लें। तो यह सोच हमेशा आपके अन्दर छुपे हुए गुणों को समाप्त कर अंधकार में ढकेल देगी। इसीलिए किसी भी काम को पूरी मेहनत और विश्वास से पूरा करने की कोशिश करें। यह भावना मनुष्य को सफलता की ओर ले जाती है।

6. असफल होने से न डरें

बच्चों को यह बात समझाने का प्रयास करें कि जीवन में सफलता मिले या असफलता मिले हमे दोनों को सहज रूप से स्वीकार करना चाहिए। जीवन में सफलता असफलता का महत्व है। जब आप असफल होकर गिरते हैं तो यह असफलता आपको वापस सफल होने के लिए प्रेरित करती है। अगली बार आप पूरे जोश के साथ सफलता को पाने की फिर कोशिश करते हैं। गिरना, सम्भलना और फिर चलना यही ज़िंदगी का नाम है। लेकिन यह सोचना कि हम असफल हो जाएंगे इसीलिए कोशिश न करे तो यह गलत है।

7. अच्छे लोग और महापुरुषों के जीवन का अनुसरण करें

बच्चों को महापुरुषों के जीवन से परिचित कराएँ। क्योंकि अच्छे लोग और महापुरुषों का जीवन न केवल हमारे व्यक्तित्व को प्रभावित करता है। अच्छी आदतों का विकास होने से बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है। यह आत्मविश्वास जीवन में सफलता की ओर लेकर जाता है।

8. समय के साथ खुद में बदलाव लाएँ

जैसे जैसे समय बढ़ता जा रहा है वैसे वैसे समाज में परिवर्तन तेज़ी से आ रहा है। बदलते हुए समय के हिसाब से खुद को बोलचाल, पहनावा आदि में बदलना भी ज़रूरी हैं। इस बदलाव से खुद में उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ता हैं। बच्चों में आत्मविश्वास उन्हें सफलता की ओर ले जाता है।

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