गेहूं के ज्वारे का रस घर पर कैसे बनाएं

गेहूं के ज्वारे का रस अंग्रेजी में व्हीटग्रास जूस (Wheat Grass Juice) कहलाता है। यह मात्र एक औषधि ना होकर एक उत्तम आहार भी है। जिसमें क्लोरोफिल, विटामिन, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम और दूसरे मिनरल्स की मात्रा पर्याप्त होती है। नियमित व्हीटग्रास जूस का सेवन करने से बॉडी में ताकत और स्टैमिना दोनों बढ़ते हैं।

कैंसर के इलाज में रोगी को गेहूं के ज्वारे का रस पिलाया जाता है। इसके अलावा कुछ दूसरी बीमारियां जैसे ब्लड शुगर, पायरिया, पथरी, गॉलब्लेडर स्टोन, दिल की बीमारी, पीलिया, लकवा, खराब पाचन क्रिया, बवासीर, बालों का झड़ना, स्किन की बीमारियां, आंखों की रोशनी कम होना या फिर घाव ठीक करने में व्हीटग्रास जूस का सेवन बहुत अधिक लाभदायक है।
गेहूं के ज्वारे का रस व्हीटग्रास जूस

घर पर गेहूं के ज्वारे कैसे उगाएं

गेहूं के बीज बोने के बाद जो पत्तियां अंकुरित होकर बाहर निकलती हैं, उसे ही गेहूं के ज्वारे कहते हैं। इसमें सभी तरह के पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो शरीर को शक्तिशाली और बलिष्ठ बनाते हैं।

– व्हीटग्रास उगाने के लिए अच्छी क्वालिटी के ऑर्गेनिक बीजों का प्रयोग कीजिए।

– गेहूं के बीजों को किसी बर्तन में 8 से 10 घंटे के लिए पानी में भिगोकर रख दें।

– मिट्टी के किसी गमले में खाद मिलाकर गेहूं के ज्वारे उगाने के लिए इतने बीज डालें इस सारी मिट्टी बीजों से ढक जाए। ध्यान रहे बीज के ऊपर दूसरा बीज नहीं आना चाहिए।

– अब पानी डालकर गमले को छायादार स्थान पर रख दें। आपको यह भी ध्यान रखना है कि गमलों पर सूरज की सीधी धूप नहीं पड़नी चाहिए। रोजाना गमलों में पानी जरूर डालें गमलों को 18 से 20 डिग्री तापमान पर ही उगाएँ। व्हीटग्रास उगाने के लिए ऑर्गेनिक खाद ही प्रयोग करें।

Ghar par gehu ke jvare ugana…

– इसी तरह दूसरे दिन एक और गमले में गेहूं के बीज बोएँ और 7 दिन तक 7 गमले में ऐसा करें।

– सातों गमलों में उगाए गए गेंहू के जवारों को नियमित रूप से पानी डालें।
गेहूं के ज्वारे का रस व्हीटग्रास जूस
– पहले दिन बोए गए गमले में सातवें दिन गेहूं के ज्वारे रस निकालने योग्य हो जाएंगे। आप इन्हें काट कर धो कर रख लें। और गमले में फिर से बुवाई करें।

– इसी तरह हर दिन एक गमले के ज्वारे काटें और खाली गमले में नए बीज बो दें। अगर आपके घर में गेहूं के ज्वारे की खपत बढ़ रही है तो आपको गमलों की संख्या बढ़ा लेनी चाहिए।

– अगर गेहूं के ज्वारे की बढ़त जल्दी ना हो रही हो तो पहले गमले के ज्वारे को सातवें दिन काटने की बजाए नवे या दसवें दिन काटें।

– गेहूं के ज्वारे 7 से 10 दिन में जितना बढ़ते हैं उन्हीं में सबसे अधिक पोषक तत्व मौजूद होते हैं।

– अगर आप बिना मिट्टी के व्हीटग्रास को उगाना चाहते हैं तो यह भी मुमकिन है। लेकिन इसमें आपको बहुत ज्यादा सावधानी रखनी होगी। इसके साथ ही साथ आपको तापमान का भी पूरा ध्यान रखना होगा।

गेहूं के ज्वारे का रस कैसे बनाएं

– गेहूं के ज्वारे की पत्तियों को चबा-चबाकर भी खाया जाता है। पर जूस बनाकर पीना आसान है। अगर आप घर पर व्हीटग्रास नहीं उगा सकते हैं तो बाजार से व्हीटग्रास पाउडर खरीद लें, जिसमें पानी डालकर जूस तैयार हो जाता है। आइए जानते हैं कि घर पर व्हीटग्रास का जूस कैसे बनाएं

– 8 से 10 पत्तियां गेहूं के ज्वारे की जड़ से काट लें। उसके बाद अच्छे से धो लें और तीन चार बार कूट-कूट कर उसका रस निकालें।

– गेहूं के ज्वारे को कूटने के बाद इसे साफ सूती कपड़े में डालकर सारा रस निचोड़ लें।

– जूस निकालने वाली किसी भी मशीन से व्हीटग्रास जूस बनाया जा सकता है। जूस निकालने के बाद इसे पीने में देर न करें।

– ध्यान रखें कि जूस को एक घूंट में नहीं बल्कि इसे चाय की तरह चुस्की लेकर पिएँ।

– जूस बनाते समय शहद, अदरक, नीम, तुलसी, गिलोय और आंवला भी डाल सकते हैं। इससे जूस के गुण बढ़ते हैं। जूस में पानी भी मिला सकते हैं।

सावधानी: गेहूं के ज्वारे का रस नमक या नींबू बिल्कुल भी ना डालें।

व्हीटग्रास जूस को कौन पी सकता है

– 3 साल से बड़ी उम्र के बच्चों को इसका सेवन कराया जा सकता है।

– महिला पुरुष दोनों इसका सेवन कर सकते हैं।

– कोई भी निरोगी या रोगी व्यक्ति इसका सेवन कर सकता है।

व्हीटग्रास जूस कितनी मात्रा में पीना चाहिए

– अगर आप किसी बीमारी से ग्रस्त हैं तो रोजाना 30 से 50 एमएल जूस दिन में तीन चार बार पिएँ।

– शुरुआत में गेहूं के ज्वारे के रस की मात्रा कम पिएँ। धीरे धीरे मात्रा बढ़ाते जाएं।

– हफ्ते में 5 दिन ज्वारे का रस पीना चाहिए।